आज के समय में स्कूटर या स्कूटी शहरों की सड़कों पर सबसे ज्यादा दौड़ने वाले वाहन बन चुके हैं. खासकर डेली कम्यूटिंग के लिए लोग स्कूटर पर ही भरोसा करते हैं. इन्हें चलाना बहुत आसान है और ऑफिस, दुकान या कॉलेज-स्कूल जाने वाले लोगों के लिए सबसे ज्यादा सुविधाजनक साबित हुए हैं.
खासकर भारत जैसे देश में जहां ट्रैफिक जाम, संकरी गलियां और रोजमर्रा की भागदौड़ आम है, स्कूटर बाइक की जगह ले चुके हैं. लेकिन एक सवाल हर किसी के मन में आता है- आखिर स्कूटर में गियर क्यों नहीं होते? जबकि मोटरसाइकिलों में 4, 5 या 6 गियर होते हैं. अगर आप भी इस सवाल को लेकर बैठे हैं, तो आज आपको इसका जवाब मिलने वाला है.
गियर की जगह क्या?
सबसे पहले समझते हैं कि स्कूटर में गियर की जगह क्या होता है. ज्यादातर मॉडर्न स्कूटर कंटीन्यूअस वेरिएबल ट्रांसमिशन (CVT) सिस्टम पर चलते हैं. ये एक तरह का ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन है, जिसमें मैनुअल गियर नहीं होते. CVT में दो पुली और एक बेल्ट होती है.
जब आप एक्सीलेटर घुमाते हैं, तो इंजन की स्पीड बढ़ने के साथ ये पुली अपने आप फैलती-संकराती है और बेल्ट की पोजीशन बदलती है. इससे गियर रेशियो लगातार और स्मूद तरीके से बदलता रहता है. बिना किसी झटके के. आपको क्लच दबाने या गियर बदलने की कोई जरूरत नहीं पड़ती, बस थ्रॉटल घुमाओ और चलते जाओ.
ये सिस्टम स्कूटर के डिजाइन से पूरी तरह मेल खाता है. स्कूटर छोटे इंजन (100-150 सीसी) वाले होते हैं, जो शहर की कम स्पीड के लिए बने हैं. मोटरसाइकिलों की तरह हाई स्पीड या लंबी दूरी के लिए नहीं. CVT छोटे इंजन को कम RPM पर रखता है, जिससे एक्सीलरेशन स्मूद रहता है और ईंधन की बचत भी होती है. अगर गियर लगाए जाते, तो स्कूटर का पूरा लुक, वजन और मेंटेनेंस बढ़ जाता.
क्यों नहीं होते गियर?
अब सवाल ये है कि ऐसा क्यों? असली कारण सुविधा और यूजर एक्सपीरियंस है. स्कूटर मुख्य रूप से महिलाओं, यूथ, शुरुआती राइडर्स और फैमिली यूज के लिए डिजाइन किए जाते हैं. ट्रैफिक में हर 10-20 मीटर पर रुकना पड़ता है. अगर गियर होते तो हर बार क्लच-गियर-एक्सीलेटर का खेल खेलना पड़ता, जो थकान भरा हो सकता है.
CVT की वजह से राइडर सिर्फ ब्रेक और थ्रॉटल पर फोकस करता है. कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं होता. खासकर भारत में जहां स्कूटर महिलाओं का पसंदीदा वाहन है, ये सुविधा गेम चेंजर साबित हुई है. पुराने समय में वेस्पा जैसे स्कूटरों में मैनुअल गियर होते थे, लेकिन 1990-2000 के बाद कंपनियों ने CVT अपनाया क्योंकि बाजार की मांग बदल गई. आज होंडा एक्टिवा, टीवीएस जूपिटर, बजाज चेतक जैसे स्कूटर पूरी तरह गियरलेस हैं और करोड़ों यूनिट बिक चुकी हैं.
CVT कितनी फायदेमंद?
CVT के फायदे सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं. ये मेंटेनेंस भी कम रखता है. मैनुअल गियर बॉक्स में चेन, स्प्रॉकेट, क्लच प्लेट्स होती हैं जो समय के साथ खराब होती हैं. CVT में बेल्ट और रोलर होते हैं, जो 20-30 हजार किलोमीटर तक आसानी से चल जाते हैं.
स्मूद एक्सीलरेशन की वजह से इंजन पर कम दबाव पड़ता है, जिससे लाइफ बढ़ती है. शहर की 40-60 किमी/घंटा स्पीड पर CVT परफेक्ट काम करता है. हाईवे पर अगर आप 80-90 किमी/घंटा भी जाते हैं तो ये हैंडल कर लेता है, लेकिन स्कूटर को स्पोर्ट्स बाइक की तरह नहीं बनाया गया.
तुलना करें तो मोटरसाइकिलों में गियर इसलिए होते हैं क्योंकि वे पावरफुल इंजन (150cc से ऊपर) वाली होती हैं. अलग-अलग गियर से राइडर को इंजन की पावर को कंट्रोल करने का पूरा अधिकार मिलता है. पहाड़ी पर लो गियर और हाईवे पर हाई गियर, लेकिन स्कूटर का उद्देश्य ही अलग है- कम्फर्ट, आसानी और रोजाना इस्तेमाल.
गियर डालने से क्या होगा?
अगर स्कूटर में गियर डाल दिए जाएं तो उसकी कीमत बढ़ जाएगी, वजन बढ़ेगा और टारगेट कस्टमर (जो आसानी चाहते हैं) दूर हो जाएंगे. कुछ लोग सोचते हैं कि गियर न होने से कंट्रोल कम हो जाता है. लेकिन हकीकत उल्टी है. CVT स्मूद होने से ब्रेकिंग और बैलेंस बेहतर रहता है. इलेक्ट्रिक स्कूटरों में तो गियर की बात ही नहीं उठती क्योंकि मोटर सीधे व्हील को पावर देती है. भविष्य में भी CVT या डायरेक्ट ड्राइव ही रहेगा.
सार: स्कूटर गियरलेस इसलिए हैं क्योंकि वे सुविधा, सुरक्षा और शहर के ट्रैफिक के लिए बने हैं. CVT टेक्नोलॉजी ने इसे संभव बनाया है. ये कोई कमी नहीं, बल्कि स्मार्ट डिजाइन का नतीजा है. अगर आप भी स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं तो जान लें- गियर न होना आपकी राइडिंग को आसान और मजेदार बनाएगा. अगली बार जब कोई पूछे कि स्कूटर में गियर क्यों नहीं होते, तो मुस्कुराते हुए कह दीजिएगा कि CVT ने गियर को पुराना बना दिया है.