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Iran Israel War News: अल्बानिया की राजधानी तिराना में उज्जैन की रहने वाली महिला कुश्ती खिलाड़ी सुरक्षित प्रियांशी प्रजापति फिलहाल सुरक्षित स्वदेश लौट रही हैं. संकट के समय मदद मिलने पर खिलाड़ी के पिता ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया और कहा कि सरकार के प्रयासों से बेटी की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी.
Ujjain News: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण मिडिल ईस्ट के कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं, जिससे कई भारतीय अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं. इसी बीच अल्बानिया की राजधानी तिराना में फंसी मध्य प्रदेश की रेसलर प्रियांशी प्रजापति अब सुरक्षित भारत लौट आई हैं. प्रियांशी तिराना में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप रैंकिंग सीरीज में हिस्सा लेने गई थीं, लेकिन प्रतियोगिता के बाद वहीं अटक गई थीं. उनकी सुरक्षित वापसी के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लगातार प्रयास किए. आखिरकार सरकारी मदद से खिलाड़ी बेटी की सकुशल भारत वापसी हो गई.
वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में जीता सिल्वर
फरवरी 2026 के आखिरी सप्ताह में 24 से 28 फरवरी तक अल्बानिया में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश की पहलवान प्रियांशी ने शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने कजाकिस्तान, अमेरिका और मेजबान देश अल्बानिया की मजबूत खिलाड़ियों को हराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. 26 फरवरी को खेले गए मुकाबले में प्रियांशी ने दमदार जीत दर्ज करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया और देश-प्रदेश का नाम रोशन किया. इसी बीच मिडिल ईस्ट में अचानक तनाव बढ़ गया. बढ़ते तनाव के कारण कई देशों में हवाई सेवाएं प्रभावित हो गईं और कई फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं, जिससे विदेश में मौजूद खिलाड़ियों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
कौन है महिला पहलवान प्रियांशी?
उज्जैन की रहने वाली कुश्ती खिलाड़ी प्रियांशी प्रजापति की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है. उनके पिता मुकेश प्रजापति खुद राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रह चुके हैं. परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है. मुकेश प्रजापति ने बेटियों को बचपन से ही पुश्तैनी अखाड़े में कुश्ती की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था. प्रियांशी ने कड़ी मेहनत और पिता के मार्गदर्शन से राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है. लेकिन, इस परिवार ने एक बड़ा दुख भी झेला. उनकी सबसे बड़ी बेटी, जो राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी थी, केवल 12 साल की उम्र में ब्रेन हेमरेज के कारण दुनिया से चली गई. इस दर्दनाक घटना के बाद भी मुकेश प्रजापति ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी बाकी बेटियों को और मजबूत बनाया और उनकी ट्रेनिंग जारी रखी. आज प्रियांशी अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर कुश्ती की दुनिया में नई पहचान बना रही हैं.
पिता ने माना मुख्य्मंत्री का आभार
प्रियंशी के पिता मुकेश प्रजापति ने कहा, उन्हें अचानक मुख्यमंत्री का फोन आया और उन्होंने बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उनकी बेटी ही नहीं, बल्कि विदेश में मौजूद अन्य भारतीय पहलवान भी सुरक्षित देश लौट सके. इसके लिए सीएम का आभारी हूं. प्रियंशी ने कहा, सीएम ने अपने व्यस्त कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उनकी चिंता की और लगातार संपर्क में रहे.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें