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गुना जिले के राघौगढ़ में हल्ला उत्सव मनाया गया, जिसमें कांग्रेस के विधायक जयवर्धन सिंह अपने बेटे के साथ शामिल हुए. इस दौरान ग्रामीणों ने लोकगीत गाए और ढोल-नगाड़ों की थाप से गुंजायमान हो उठा. पिछले 211 सालों से यह उत्सव तीज के अवसर पर मनाया जाता है.
हल्ला उत्सव में शामिल हुए जयवर्धन सिंह
गुना जिले के राघौगढ़ की ऐतिहासिक धरा पर शुक्रवार को होली की तीज के अवसर पर शौर्य, विजय और अटूट परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला. रियासतकालीन परंपरा का निर्वहन करते हुए राघौगढ़ किले पर हल्ला उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस गौरवशाली आयोजन में राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह अपने पुत्र के साथ सम्मिलित हुए और क्षेत्रवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं.
इतिहास के पन्नों से जुड़ी है हल्ला की गूंज
राघौगढ़ में हल्ला उत्सव की यह परंपरा महज एक उत्सव नहीं, बल्कि पूर्वजों के पराक्रम की याद दिलाती है. इसकी शुरुआत आज से ठीक 211 वर्ष पूर्व हुई थी. इतिहास के अनुसार तत्कालीन राजा जय सिंह के कार्यकाल के दौरान अंग्रेजी सेनापति जॉन बप्टिस ने विशाल सेना के साथ राघौगढ़ किले की घेराबंदी कर ली थी. सीमित संसाधनों के बावजूद राजा जय सिंह ने अदम्य साहस और विलक्षण युद्ध नीति का परिचय दिया. उन्होंने अंग्रेजी सेनापति के पुत्र को बंदी बना लिया, जिससे दुश्मन सेना के हौसले पस्त हो गए और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा.
अंग्रेजी सेना के रणक्षेत्र छोड़कर भागने की पहली सूचना नांदनेर के ग्रामीणों ने दौड़ते हुए आकर किले पर दी थी. उसी ऐतिहासिक क्षण की स्मृति में तब से लेकर आज तक हर वर्ष होली की तीज पर हल्ला उत्सव मनाया जाता है.
फाग की धुनों पर थिरके ग्रामीण, जयवर्धन ने लिया हल्ला
उत्सव की शुरुआत किले के भीतर विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई. इसके पश्चात विधायक जयवर्धन सिंह किले की उस प्राचीर और पहाड़ी के किनारे पहुंचे, जहां सदियों पहले जीत का संदेश पहुंचा था. परंपरा के अनुसार पहाड़ी की तलहटी से ग्रामीण जयकारे लगाते हुए दौड़कर ऊपर पहुंचे और हल्ला दिया.
इस दौरान समूचा किला परिसर फाग के लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की थाप से गुंजायमान हो उठा. जयवर्धन सिंह ने ग्रामीणों के साथ फाग के गीतों का आनंद लिया और उनके साथ थिरकते हुए खुशियां बांटीं. उन्होंने सभी नागरिकों को गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी और परंपरा के अनुरूप हल्ला का विशेष प्रसाद वितरित किया.