चने में फली बनते समय ही लगता है ये रोग, सूख जाती है फसल, एक्सपर्ट से जानें लक्षण, बचाव

चने में फली बनते समय ही लगता है ये रोग, सूख जाती है फसल, एक्सपर्ट से जानें लक्षण, बचाव


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चने में फली बनते समय ही लगता है ये रोग, सूख जाती है फसल, जानें बचाव, लक्षण

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Agri Tips: रबी सीजन में चना की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन बुवाई के करीब 60 दिन बाद फसल में खतरनाक कीट और रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. शुरुआत में एक-दो पौधे सूखने लगते हैं, जिसे किसान अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. समय पर नियंत्रण न करने पर यह समस्या धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाती है और फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.

Sidhi News: मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर चने की खेती की जाती है. चना किसानों के लिए रबी सीजन की प्रमुख दलहन फसल है. लेकिन इस समय विंध्य क्षेत्र में चना की फसल में उग्रा रोग का प्रकोप देखने को मिल रहा है. इस रोग के कारण खेतों में पौधे पीले पड़कर मुरझा रहे हैं और धीरे-धीरे सूखने लगे हैं. इससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह रोग समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है.

सीधी के वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 को बताया कि उग्रा रोग खासतौर पर बुवाई के करीब दो महीने बाद ज्यादा फैलता है. इसलिए इस समय किसानों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होती है. जब चना की फसल में फूल आने लगते हैं और घेटे बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, उसी समय इस रोग का खतरा सबसे अधिक रहता है. यदि इस दौरान खेत में ज्यादा पानी दे दिया जाए या जल निकासी की व्यवस्था ठीक न हो, तो रोग तेजी से फैलने लगता है.

60-65 दिन में असर
संजय सिंह ने बताया कि उग्रा रोग को विल्ट या उक्ता रोग भी कहा जाता है. यह एक प्रकार का फंगल रोग है, जो पौधे की जड़ों और तने को अंदर से कमजोर कर देता है. आमतौर पर इसका असर बुवाई के 60 से 65 दिन बाद दिखाई देने लगता है. इस समय पौधे में घेटे बन रहे होते हैं और यदि मौसम में अधिक नमी हो या खेत में पानी रुक जाए, तो रोग तेजी से फैल सकता है. कई किसान इसे सामान्य सूखना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरा खेत इसकी चपेट में आ सकता है.

जानें रोग की पहचान और बचाव
इस रोग की पहचान यह है कि पौधे अचानक सूखने लगते हैं. शुरुआत में खेत में कुछ ही पौधे प्रभावित होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत में फैल सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से उग्रा रोग का खतरा और बढ़ जाता है. संजय सिंह के अनुसार, इस रोग से बचाव के लिए सिंचाई का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है. चना की फसल में जरूरत से ज्यादा पानी नहीं देना चाहिए. पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 30 से 35 दिन बाद करनी चाहिए, जबकि दूसरी सिंचाई 60 से 65 दिन के आसपास की जा सकती है. लेकिन, फूल और घेटा बनने की अवस्था में सिंचाई करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय पानी देने से रोग तेजी से फैल सकता है.

इस दवा का छिड़काव करें
यदि खेत में उग्रा रोग के लक्षण दिखाई देने लगें तो तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए. खड़ी फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे रोग बढ़ सकता है. इसके नियंत्रण के लिए मेटालेक्जिल और मैनकोजेब दवा 30 ग्राम प्रति पंप की दर से छिड़काव करना चाहिए, ताकि पौधों की जड़ और तना सुरक्षित रह सके और फसल को अधिक नुकसान से बचाया जा सके.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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