टमाटर-प्याज सड़ने से पहले बना लो ‘सोना’! छोटी प्रोसेसिंग यूनिट ने खोला मुनाफे का रास्ता

टमाटर-प्याज सड़ने से पहले बना लो ‘सोना’! छोटी प्रोसेसिंग यूनिट ने खोला मुनाफे का रास्ता


शिवांक द्विवेदी, सतना: किसान अगर अपनी उगाई हुई सब्जियों को सीधे मंडी में बेचने के बजाय उन्हें प्रोसेस करके पैकिंग के साथ बाजार में उतारें तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है. खासतौर पर टमाटर, आलू, प्याज और मटर जैसी सब्जियों की प्रोसेसिंग करके पाउडर, पेस्ट, चिप्स या फ्रोजन प्रोडक्ट बनाकर बेचना किसानों के लिए मुनाफे का बड़ा जरिया बन सकता है. इससे जहां किसानों को फसल खराब होने के नुकसान से बचाव मिलता है वहीं वे अपने प्रोडक्ट को लंबे समय तक स्टोर करके बाजार में अच्छी कीमत भी हासिल कर सकते हैं.

 सब्जियों की प्रोसेसिंग से बढ़ेगा मुनाफा
लोकल 18 को जानकारी देते हुए सोहावल विकासखंड प्रभारी उन्नयन विकास अधिकारी सुधा पटेल ने बताया कि क्षेत्र में किसान टमाटर, मटर और प्याज की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब बाजार में कीमत कम होती है तो किसान अपनी उपज को स्टोर करके रखते हैं. खासकर प्याज को अगर लंबे समय तक रखा जाए तो उसमें सड़न शुरू हो जाती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में बेहतर विकल्प यह है कि किसान अपनी फसल की प्रोसेसिंग करें. उदाहरण के तौर पर प्याज से प्याज पाउडर बनाया जा सकता है जिसकी होटल और फूड इंडस्ट्री में हमेशा मांग बनी रहती है. इसी तरह अन्य सब्जियों को भी प्रोसेस कर लंबे समय तक इस्तेमाल योग्य बनाया जा सकता है.

कई तरह के प्रोडक्ट बनाकर कर सकते हैं बिक्री
विशेषज्ञों के अनुसार आलू, टमाटर, प्याज, मिर्च, अदरक, गाजर, मूली, मटर, भिंडी और करेला जैसी सब्जियों की प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जा सकती है. इसके जरिए डिहाइड्रेशन यानी सूखी सब्जियां, फ्रोजन फूड, पेस्ट, प्यूरी, पाउडर, अचार और चिप्स जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. आलू से चिप्स, फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज और आलू पाउडर या फ्लेक्स तैयार किए जा सकते हैं, जो बाजार में काफी लोकप्रिय हैं. वहीं टमाटर से प्यूरी, पेस्ट, केचप और टमाटर पाउडर बनाया जा सकता है. इसी तरह हरी मटर को फ्रोजन करके पैकिंग की जाती है जो सालभर बाजार में बिकती है. किसान इन प्रोडक्ट्स को अपने ब्रांड नाम से पैक कर बाजार में बेच सकते हैं जिससे उनकी पहचान भी बनेगी और आय भी बढ़ेगी.

सरकार की योजना से मिलेगा आर्थिक सहारा
सुधा पटेल ने बताया कि किसानों और युवाओं को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना चलाई जा रही है. यह केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके माध्यम से बेरोजगार युवा और महिलाएं भी घर बैठे अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं. इस योजना के तहत प्रोसेसिंग यूनिट लगाने में आने वाली लागत पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है वहीं अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है. अगर आवेदक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है तो बैंक के माध्यम से लोन भी उपलब्ध कराया जाता है जिससे व्यवसाय शुरू करना आसान हो जाता है.

 ऐसे करें योजना में आवेदन
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को अपने नजदीकी उद्यानिकी विभाग में जाकर या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा. आवेदन के दौरान फोटो, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और जमीन से संबंधित दस्तावेज जमा करने होते हैं. इसके बाद विभाग की ओर से डीपीआर यानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाती है जिसमें विभाग के विशेषज्ञ मार्गदर्शन देते हैं. डीपीआर तैयार होने के बाद फाइल बैंक में भेजी जाती है और प्रक्रिया पूरी होने पर ऋण और सब्सिडी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है.

यूनिट लगाने की लागत भी अलग-अलग
सब्जियों की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की लागत व्यवसाय के स्तर और मशीनों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. एक छोटी यूनिट जिसमें अचार, पेस्ट या पाउडर बनाने का काम किया जाए उसे करीब 2 से 5 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया जा सकता है जिसमें बेसिक ग्राइंडर और पैकिंग मशीन शामिल होती हैं. वहीं मध्यम स्तर की यूनिट जैसे फ्रोजन मटर या डिहाइड्रेशन प्लांट लगाने के लिए लगभग 10 से 30 लाख रुपये तक की जरूरत पड़ती है. वहीं पूरी तरह ऑटोमैटिक बड़ी यूनिट जैसे चिप्स प्लांट या कैनिंग यूनिट लगाने में 50 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक का खर्च आ सकता है. इसके अलावा जमीन, शेड, लाइसेंस और वर्किंग कैपिटल की लागत अलग से जुड़ती है.



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