Last Updated:
Suryakumar Yadav comment Bada bhai, papa banke kuch nahi hoga; सूर्यकुमार यादव का कहना है कि टी20 टीम की कप्तानी संभालने के छह महीने बाद उन्हें समझ आ गया था कि युवा खिलाड़ियों के लिए पापा या बड़ा भाई बनने में कोई फायदा नहीं है. सूर्या ने यह बात न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार को खेले जाने वलो टी20 वर्ल्ड कप फाइनल से एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही.
सूर्यकुमार यादव अपने खिलाड़ियों के लिए बड़े भाई या पापा की भूमिका नहीं निभाना चाहते.
अहमदाबाद. भारत के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव को कप्तानी संभालने के करीब छह महीने बाद समझ आ गया कि टीम के युवा खिलाड़ियों के लिए पिता या बड़े भाई जैसी भूमिका निभाना ज्यादा फायदेमंद नहीं है. मुंबई के इस बल्लेबाज ने महसूस किया कि टीम में खुलकर बात करना, अपनी राय रखना और हर खिलाड़ी को अपनी तरह खेलने की आजादी देना ही सबसे अच्छा तरीका है. मुख्य कोच गौतम गंभीर मानते हैं कि इस फॉर्मेट में सात गेंदों में 21 रन भी उतने ही जरूरी हैं जितना शतक.
सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने गंभीर के साथ मिलकर तय किया कि वह पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के रास्ते पर चलेंगे, लेकिन अपने तरीके से. ड्रेसिंग रूम के माहौल और युवा खिलाड़ियों को दी जाने वाली सलाह के बारे में पूछने पर सूर्यकुमार ने मजाक में कहा, ‘वे मुझे ड्रेसिंग रूम में ज्यादा बोलने ही नहीं देते. वे अपनी शर्तों पर चलते हैं. मैंने देखा है कि जब उन्हें आजादी मिलती है तो मैदान पर उनका अंदाज बिल्कुल अलग होता है.’ उन्होंने कहा, ‘कप्तानी के पांच-छह महीने बाद मैं इस टीम से पूरी तरह जुड़ पाया. तब समझ आया कि बड़े भाई या पिता जैसा बनने का कोई मतलब नहीं है. आपको उन्हें खुला छोड़ना होगा. तभी आप उनसे सबसे अच्छा प्रदर्शन ले सकते हैं.’ सूर्यकुमार के मुताबिक टीम एक गुलदस्ते की तरह है जिसमें हर फूल की अपनी खूबसूरती और जगह होती है.
सूर्यकुमार यादव अपने खिलाड़ियों के लिए बड़े भाई या पापा की भूमिका नहीं निभाना चाहते.
उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘हर खिलाड़ी की अपनी क्षमता और ताकत होती है. ऐसा नहीं है कि मैंने किसी से कुछ कहा ही नहीं. मैंने खिलाड़ियों से बात की है. लेकिन जो यह महसूस करते हैं कि मैंने उन्हें छूट दी है, उनकी संख्या अब पहले से ज्यादा हो गई है. अब मैं ज्यादा दखल नहीं देता.’ आठ मार्च को सूर्यकुमार के करियर का सबसे बड़ा दिन हो सकता है, लेकिन उन्होंने अपना मजाकिया अंदाज नहीं छोड़ा.
जब उनसे पूछा गया कि क्या रोहित शर्मा की जगह भरना मुश्किल है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘सर, जूते मेरे हैं, मैं सिर्फ उनके कदमों पर चल रहा हूं.’ उन्होंने फिर गंभीरता से जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने रोहित की कप्तानी से बहुत कुछ सीखा है. भारतीय कप्तान ने कहा, ‘जब मैं उनके साथ खेल रहा था तब उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला. इसलिए मैंने वही रणनीति और वही मूल बातें अपनाने की कोशिश की. मैंने इसमें अपना तरीका जोड़ने की कोशिश की और यह काफी अच्छा रहा है.’ सूर्यकुमार ने माना कि फाइनल जैसे बड़े मैच में दबाव होना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा, ‘कप्तान के तौर पर मुझ पर दबाव जरूर होगा लेकिन उतना ही उत्साह भी है, क्योंकि वर्ल्ड कप फाइनल खेलने का मौका बार-बार नहीं मिलता, वह भी भारत में.’
न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप का यह फाइनल सूर्यकुमार के लिए पिछले दो साल की मेहनत का नतीजा है. उन्होंने कहा, ‘हम इस मंच के लिए काफी समय से तैयारी कर रहे हैं. यह सफर दो साल पहले शुरू हुआ था और अब फिर उसी स्टेडियम में लौट आए हैं, जहां 2023 में हमने इसे छोड़ा था. उम्मीद है कि हम अच्छा क्रिकेट खेलेंगे और मुश्किल हालात में भी हिम्मत दिखाएंगे.’
About the Author
करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें