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जब हम किसी महिला पुलिस अधिकारी की कल्पना करते हैं, तो अक्सर थाने या चौकियों का दृश्य सामने आता है. लेकिन आज हम आपको मध्य प्रदेश की एक ऐसी जांबाज बेटी से मिलवाने जा रहे हैं, जिसकी सुबह फाइलों से नहीं, बल्कि AK-47 और पिस्तौल की खनक से होती है.
अनीता उइके
मध्य प्रदेश के मंडला जिले की पुलिस लाइन में पदस्थ यह हैं अनीता उइके, जिन्होंने छिंदवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव रोहना कला से निकलकर खाकी वर्दी का वह रास्ता चुना, जहां अब तक सिर्फ पुरुषों का दबदबा माना जाता था. अनीता मध्य प्रदेश पुलिस की पहली ऐसी महिला सब-इंस्पेक्टर हैं, जो ‘आर्म्स एंड एम्युनिशन’ (हथियार विभाग) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. जहां लोग हथियारों के नाम से सहम जाते हैं.
अनीता को पता है हथियारों की बारीकियां
अनीता उइके दिन भर हथियारों के बीच रहती हैं. जिले के बेड़े में शामिल आधुनिक हथियारों की साफ-सफाई, मेंटेनेंस और उनके स्टॉक का हिसाब-किताब रखना उनकी उंगलियों पर रहता है. पिस्तौल हो या घातक AK-47, या फिर दंगे रोकने वाली आंसू गैस की गन. इन सब की बारीकियों को अनीता बखूबी समझती हैं.
अनीता उइके ने कही ये बात
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुकी अनीता उइके के लिए इन जटिल हथियारों के पुर्जे खोलना और जोड़ना किसी खेल जैसा है. जिले के पूरे शस्त्रागार (Armoury) की कमान आज इस बेटी के हाथ में है. अनीता उइके ने बताया कि मैं साल 2018 से पदस्थ हूं. पुलिस मुख्यालय द्वारा जो हथियार दिए जाते हैं. उसे मेंनटेन किया जाता है. मैं महिला ऑर्म्स के पद पर पहली महिला सब इंस्पेक्टर हूं और अभी नया बैच नहीं आया है.
पुलिस के आला अधिकारी भी अनीता के जज्बे से हैं खुश
अनीता के इस जज्बे को देखकर पुलिस के आला अधिकारी भी गदगद हैं. मंडला के एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा ने कहा कि यह हमारे विभाग और पूरे जिले के लिए बहुत ही गर्व की बात है. प्रदेश की पहली महिला आर्म्स प्रभारी अनीता उइके हैं और यह हमारे मंडला जिले में पदस्थ हैं.
अनीता जिस कुशलता से हथियारों के रखरखाव और आर्म्स डिपार्टमेंट की कमान संभाल रही हैं. वह काबिले तारीफ है. वे प्रदेश की अन्य बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं. यह कहानी है उस संकल्प की, जिसने साबित कर दिया कि खाकी की शान और हथियारों की कमान, अब सुरक्षित हाथों में है.