भोपाल/उज्जैन. मध्य प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में उज्जैन अब नई ऊंचाइयों को छूने को तैयार है. दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के महत्वपूर्ण हिस्से विक्रम उद्योगपुरी में फेज-2 का श्रीगणेश हो चुका है, जो उज्जैन को फार्मास्यूटिकल और मेडिकल हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है. एमपीआईडीसी द्वारा विकसित इस परियोजना में सबसे पहले Alkem Laboratories Limited को 30 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहां कंपनी टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन जैसे उत्पादों की अत्याधुनिक इकाई लगाएगी. यह निवेश न केवल हजारों युवाओं को रोजगार देगा बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा. फेज-1 की सफलता के बाद फेज-2 में 488 हेक्टेयर क्षेत्र में विकास कार्य तेज हो गए हैं, जहां 382 हेक्टेयर औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित है. बुनियादी ढांचे पर 455 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जो सड़क, बिजली, पानी और सीवेज जैसी सुविधाएं प्रदान करेगा. यह परियोजना उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी, जहां पहले से पेप्सिको, अमूल और वोल्वो-आयशर जैसी कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं.
उज्जैन का औद्योगिक विकास राज्य की ‘इन्वेस्ट MP’ नीति का जीता-जागता उदाहरण है, जो निवेशकों को आकर्षित कर रहा है. फेज-1 में सभी भूखंड आवंटित हो चुके हैं और अब फेज-2 में Alkem जैसी बड़ी फार्मा कंपनी की एंट्री से क्षेत्र फार्मा हब बनने की ओर अग्रसर है. यह निवेश लगभग 1000 करोड़ रुपये का अनुमानित है, जो प्रत्यक्ष 2000 और अप्रत्यक्ष हजारों रोजगार सृजित करेगा. परियोजना DMIC के तहत विकसित हो रही है, जो बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स प्रदान करती है. कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ ने कहा कि यह उज्जैन को फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस का प्रमुख केंद्र बनाएगा. राज्य सरकार की योजनाओं से युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, जिससे पलायन रुकेगा और आर्थिक विकास तेज होगा. यह कदम मध्य प्रदेश को औद्योगिक शक्ति के रूप में मजबूत करेगा, जहां पहले से ही पिथमपुर और देवास जैसे क्षेत्र सफल हैं.
विक्रम उद्योगपुरी फेज-2: श्रीगणेश और Alkem की एंट्री
एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 का शुभारंभ हो चुका है. लगभग 488 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में सबसे पहले Alkem Laboratories Limited को 30 एकड़ भूमि आवंटित की गई है. कंपनी यहां टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन जैसे फार्मास्यूटिकल उत्पादों की अत्याधुनिक इकाई लगाएगी, जो उज्जैन को औषधि निर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करेगी.
रोजगार सृजन: 2000 प्रत्यक्ष नौकरियां
Alkem की इकाई से लगभग 2000 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. परिवहन, पैकेजिंग, सप्लाई चेन और अन्य सहायक गतिविधियों से हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे. यह निवेश युवाओं के लिए स्थानीय अवसर पैदा करेगा, पलायन रोकेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा.
बुनियादी ढांचा विकास: 455 करोड़ का निवेश
फेज-2 में 382 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए निर्धारित है. डीएमआईसी विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड के बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है. सड़क नेटवर्क, स्ट्रीट लाइट, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, पेयजल, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 33/11 केवी विद्युत लाइन, सबस्टेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं विकसित होंगी.
फेज-1 की सफलता: प्रमुख कंपनियां स्थापित
फेज-1 में 773 एकड़ क्षेत्र विकसित हुआ, जिसका उद्घाटन अक्टूबर 2023 में PM मोदी ने किया था. सभी भूखंड आवंटित हो चुके हैं, जहां पेप्सिको, अमूल, वोल्वो-आयशर, फेना, सुधाकर पाइप्स और इस्कॉन बालाजी जैसी कंपनियां संचालित हो रही हैं. यह सफलता फेज-2 के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है.
फार्मा हब की नई पहचान: उज्जैन का भविष्य
विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 उज्जैन को फार्मा और मेडिकल हब के रूप में स्थापित करेगा. राजेश राठौड़ ने कहा कि यह परियोजना बड़े निवेश आकर्षित करेगी और क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगी. DMIC की कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स आसान होगा, जो फार्मा इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद है.
राज्य की औद्योगिक नीति: निवेश आकर्षण
मध्य प्रदेश की निवेश नीति और DMIC परियोजना से उज्जैन तेजी से औद्योगिक केंद्र बन रहा है. फेज-2 से कुल निवेश 1000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है. युवाओं के लिए बंपर नौकरियां, कौशल विकास और आर्थिक उन्नति का रास्ता खुलेगा. यह कदम राज्य को औद्योगिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण है.