Last Updated:
Balaghat News: बालाघाट के भमोड़ी गांव के रहने वाले किसान सुरेश बिसेन ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि सरकार किसानों को सुविधाएं देने का दावा तो कर रही है लेकिन वे किसानों तक नहीं पहुंच रही हैं. सरकार को धरातल पर काम करना चाहिए.
बालाघाट. मध्य प्रदेश में साल 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में किसानों के लिए कई ऐलान किए थे. इसे ‘मोदी की गारंटी’ का नाम दिया था. अब इस बात को करीब ढाई साल हो चुके हैं. इतने समय बाद गेहूं पर सरकार ने बड़ा फैसला किया है, जिसके तहत अब गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी. वहीं राज्य सरकार 40 रुपये बोनस भी दे रही है. लोकल 18 ने सरकार के इस फैसले पर बालाघाट शहर से लगे गांवों के किसानों से बात की और उनकी राय जानी.
हाल ही में बड़वानी में सरकार की कृषि कैबिनेट का आयोजन हुआ था, जहां पर किसानों के हित के लिए अलग-अलग योजनाओं पर सरकार द्वारा 26000 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया गया था. इसी के साथ इसे कृषि कल्याण वर्ष भी घोषित किया है. अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का बयान आया है कि इस बार केंद्र सरकार ने गेहूं की खरीदी 2585 रुपये की दर से की है. अब राज्य सरकार इसपर 40 रुपये का बोनस देने वाली है. पांच साल में 2700 रुपये प्रति क्विंटल का दाम करेंगे. अब 2625 रुपये तक पहुंच चुके हैं.
क्या बोले बालाघाट के किसान?
बालाघाट के भमोड़ी गांव के रहने वाले किसान सुरेश बिसेन ने लोकल 18 से कहा कि सरकार किसानों को सुविधाएं देने का दावा कर रही है लेकिन वे किसानों तक नहीं पहुंच रही हैं. सरकार को धरातल पर काम करना चाहिए. बालाघाट में किसानों के पास सिंचाई की खास सुविधा नहीं है. ऐसे में इसपर सरकार को सोचना चाहिए. बालाघाट में गेहूं का रकबा कम है, इसकी इतनी खेती भी नहीं होती है.
किसानों ने की तारीफ
गोंगलाई गांव के रहने वाले चतुर्भुज पटले ने लोकल 18 से कहा कि सरकार के फैसले से हम खुश हैं लेकिन धान का रेट बढ़ना चाहिए. सतीश पिछोड़े का कहना है कि सरकार का यह कदम ऐतिहासिक है. इससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा. बालाघाट में धान की खेती ज्यादा होती है. वहीं गेहूं की खेती हो, इसपर सरकार को ध्यान देना चाहिए.
मोदी की गारंटी हुई फेल
इधर किसान नेता और किसान गर्जना के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने कहा कि सरकार ने ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर चुनाव से पहले संकल्प पत्र जारी किया था. सरकार का यह तीसरा साल है. ऐसे में सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए. सरकार सिर्फ 40 रुपये बोनस देकर अपनी पीठ थपथपा रही है. सरकार अगर किसान हितैषी है, तो अपने वादे पूरे करने चाहिए. वहीं उन्होंने धान के बोनस को बंद कर दिया.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
