गेहूं-चना कटाई के बाद खाली खेत नहीं! मार्च-अप्रैल में ऐसे लगाएं फलों का बगीचा

गेहूं-चना कटाई के बाद खाली खेत नहीं! मार्च-अप्रैल में ऐसे लगाएं फलों का बगीचा


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गेहूं-चना कटाई के बाद खाली खेत नहीं! मार्च-अप्रैल में ऐसे लगाएं फलों का बगीचा

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Gardening tips : वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी ने बताया कि जिले की मिट्टी और मौसम कई तरह के फलों के लिए उपयुक्त है. किसान नींबू, केला, पपीता, अमरूद, संतरा, आम, सीताफल और चीकू जैसे फलों की खेती कर सकते हैं. सही तरीके से बगीचा लगाने पर किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है.

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खरगोन. खरगोन जिले में अब किसान धीरे-धीरे पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं. खेती में बढ़ती लागत और कम होती आमदनी के कारण किसान नए विकल्प तलाश रहे हैं. यही वजह है कि अब कई किसान फलों के बगीचे लगाने की तैयारी कर रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जो किसान रबी फसलों की कटाई के बाद फलों का बगीचा लगाना चाहते हैं, उन्हें अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. गर्मी के मौसम में खेत की तैयारी करने से पौधों की बढ़त अच्छी होती है और आगे चलकर उत्पादन भी ज्यादा मिलता है.

चुंकि, खरगोन और आसपास के निमाड़ क्षेत्र में किसान लंबे समय से गेहूं, चना, कपास, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलें उगा रहे हैं. लेकिन इन फसलों में लागत लगातार बढ़ रही है और मुनाफा उतना नहीं मिल पा रहा है. इससे किसान परेशान हैं और नई खेती की ओर ध्यान दे रहे हैं. इसी कारण अब कई किसान फलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. जिन किसानों ने पहले से बागवानी शुरू की है, उनका मानना है कि फलों की खेती में एक बार की मेहनत के बाद कई सालों तक उत्पादन लिया जा सकता है. साथ ही बाजार में लगातार मांग के चलते पूरे वर्ष आमदनी होती रहती है.

निमाड़ की जलवायु फलों के लिए अनुकूल
उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी ने बताया कि जिले की मिट्टी और मौसम कई तरह के फलों के लिए उपयुक्त है. किसान नींबू, केला, पपीता, अमरूद, संतरा, आम, सीताफल और चीकू जैसे फलों की खेती कर सकते हैं. सही तरीके से बगीचा लगाने पर किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है. जो किसान भाई इस सीजन में रबी फसलों की कटाई के बाद अपने खेतों में कपास, सोयाबीन की जगह फलों का बगीचा लगाना चाहते है उन्हें अभी से तैयारी में जुट जाना चाहिए.

कैसे करें गड्ढों की खुदाई
डॉ. त्यागी ने बताया कि मार्च-अप्रैल में जब खेत खाली हो जाएंगे तब किसानों को खेत में गड्ढे खोदने का काम शुरू कर देना चाहिए. गर्मी के समय गड्ढे तैयार करने से मिट्टी अच्छी तरह धूप में पक जाती है और कीट व रोग भी कम होते हैं. गड्ढे खोदते समय किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि हर गड्ढा लगभग 1 मीटर लंबा, 1 मीटर चौड़ा और 1 मीटर गहरा होना चाहिए. गड्ढे खोदने के बाद इन्हें एक से डेढ़ महीने तक खुला छोड़ देना चाहिए ताकि तेज धूप मिट्टी को अच्छी तरह तैयार कर सके.

खाली गड्ढों में डाले ये मिश्रण
जब गड्ढे कुछ समय तक धूप में खुले रह जाएं, तब मानसून आने से पहले उनमें मिट्टी और खाद मिलाकर भरना चाहिए. गड्ढों की ऊपरी मिट्टी में करीब 25 किलो गोबर की खाद, एक किलो नीम की खली, 25 ग्राम ट्राइकोडर्मा, 25 ग्राम पीएचबी और 25 ग्राम मेजेटो डॉक्टर मिलाना चाहिए. इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर गड्ढों में भर दें. ध्यान रखें कि गड्ढों को जमीन की सतह से लगभग 6 इंच ऊपर तक भरना चाहिए. इससे बारिश के समय पानी भरने की समस्या कम होती है और पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं.

पौधे लगाते समय रखें ये सावधानियां
बारिश शुरू होने के बाद तैयार गड्ढों में पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधे लगाते समय किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पौधे का ग्राफ्टिंग वाला हिस्सा जमीन से करीब 6 इंच ऊपर रहे. इससे पौधे की बढ़त सही रहती है और बीमारी का खतरा भी कम होता है. पौधा लगाने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना जरूरी है. साथ ही पौधे को सहारा देने के लिए करीब 3 फीट ऊंचा लकड़ी का डंडा लगाना चाहिए. इससे हवा या बारिश में पौधा गिरने से बचता है और सीधा बढ़ता है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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