नारायण काछी हत्याकांड, पूर्व टीआई समेत दो बरी: नरसिंहपुर कोर्ट ने माना- विवेचना में हुईं गंभीर त्रुटियां, बयानों से मुकरे मुख्य गवाह – Narsinghpur News

नारायण काछी हत्याकांड, पूर्व टीआई समेत दो बरी:  नरसिंहपुर कोर्ट ने माना- विवेचना में हुईं गंभीर त्रुटियां, बयानों से मुकरे मुख्य गवाह – Narsinghpur News




नरसिंहपुर जिले के करेली थाना क्षेत्र के खिरिया गांव में नौ माह पूर्व हुए चर्चित नारायण काछी हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश वैभव सक्सेना ने मुख्य आरोपी बसंत वंशकार और स्टेशनगंज के पूर्व टीआई शंकरलाल झारिया को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को अपर्याप्त बताया और विवेचना में कई गंभीर तकनीकी खामियां पाईं। यह था मामला 10 जून 2025 को खिरिया गांव में नारायण काछी का लहुलुहान हालत में शव मिला था। पुलिस ने दावा किया था कि पूर्व टीआई शंकरलाल झारिया ने अपने समधी को फंसाने और दहेज प्रताड़ना के पुराने विवाद का बदला लेने के लिए 50 हजार रुपए की सुपारी देकर बसंत वंशकार से यह हत्या करवाई थी। विवेचना में रह गईं ये बड़ी खामियां बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय ताम्रकार ने पुलिस की जांच पर कई सवाल उठाए, जिन्हें न्यायालय ने स्वीकार किया: डीएनए परीक्षण का अभाव: पुलिस ने मौके से मिले टूटे दांतों का डीएनए कराया, लेकिन हत्या में प्रयुक्त सब्बल और कपड़ों पर लगे खून का मृतक के खून से मिलान नहीं कराया। पहचान और फिंगरप्रिंट: वारदात स्थल से बरामद शराब की बोतलों और अन्य वस्तुओं पर मिले फिंगरप्रिंट का मिलान आरोपी से नहीं कराया गया। इसके अलावा जब्त कपड़ों की पहचान भी मृतक के परिजनों से नहीं कराई गई। साक्ष्यों की कड़ी टूटी: कोर्ट ने माना कि ‘अंतिम बार देखे जाने’ के सिद्धांत और घटना के समय के बीच 5 से 7 घंटे का बड़ा अंतर था, जो आरोपी को दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। बयानों से मुकरे गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 35 गवाहों में से महत्वपूर्ण गवाह सुनवाई के दौरान अपने बयानों से मुकर गए। सीसीटीवी फुटेज से संबंधित गवाह ने फुटेज की पहचान और किसी भी प्रकार का प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। वहीं, जब्ती के गवाहों ने भी पुलिस की कार्रवाई को अपने सामने होने से मना कर दिया। ‘षडयंत्र’ की कहानी भी प्रमाणित नहीं न्यायालय ने पूर्व टीआई द्वारा अपने समधी को फंसाने की कहानी को भी खारिज कर दिया। पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर जो मोबाइल कॉल रिकॉर्ड (CDR) और एसएमएस पेश किए थे, उन्हें भी किसी षडयंत्र का पुख्ता सबूत नहीं माना गया। मुख्य आरोपी बसंत वंशकार, जो 260 दिनों से जेल में था, उसे रिहा करने के आदेश दिए गए हैं। एसपी ने तलब की फैसले की डायरी इस सनसनीखेज मामले में आरोपियों के बरी होने के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के अनुसार, पुलिस अधीक्षक ने फैसले से संबंधित डायरी तलब की है। विवेचना में रही खामियों की पड़ताल की जाएगी और हाई कोर्ट में अपील करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ये आरोपी नहीं थे, तो नारायण काछी का असली हत्यारा कौन है। यह खबर भी पढ़ें… रिटायर्ड थाना प्रभारी ने समधी से बदला लेने रची साजिश:नरसिंहपुर में सुपारी देकर शख्स की हत्या कराई, शव बहू के घर के सामने फिंकवाया नरसिंहपुर जिले में एक सेवानिवृत्त थाना प्रभारी ने समधी से बदला लेने के लिए एक निर्दोष शख्स की हत्या करवाई। करेली पुलिस ने शुक्रवार को पूर्व थाना प्रभारी शंकरलाल झारिया और हत्यारे बसंत वंशकार को गिरफ्तार कर लिया है। पढ़ें पूरी खबर



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