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International Women’s Day 2026: डॉ प्रीति गुर्जर ने लोकल 18 से कहा कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय यानी यूट्रस के मुंह पर होने वाला कैंसर होता है. यह एक गंभीर बीमारी है. अच्छी बात यह है कि इसे समय रहते रोका जा सकता है.
खंडवा. आज के दौर में भी महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं हैं, जिन पर खुलकर बात करना आसान नहीं होता. खासकर स्त्री रोग और कैंसर जैसी बीमारियों को लेकर महिलाएं अक्सर झिझक जाती हैं लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ प्रीति गुर्जर इस सोच को बदलने की कोशिश कर रही हैं. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उनकी यह पहल खास चर्चा में है. डॉ प्रीति गुर्जर पिछले एक साल से सोशल मीडिया और जागरूकता अभियानों के जरिए महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बारे में जागरूक कर रही हैं. सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर की दूसरी सबसे आम बीमारी मानी जाती है. चिंता की बात यह है कि इस बीमारी से हर साल हजारों महिलाओं की मौत हो जाती है. इसके बावजूद कई महिलाएं इसके बारे में खुलकर बात करने से कतराती हैं.
खंडवा में अपना गुर्जर हॉस्पिटल संचालित करने वाली डॉ प्रीति गुर्जर निमाड़ क्षेत्र की जानी-मानी गायनेकोलॉजिस्ट हैं. वह महिलाओं को इस बीमारी के लक्षण, बचाव और वैक्सीन के बारे में लगातार जानकारी दे रही हैं. लोकल 18 से बातचीत में डॉ प्रीति बताती हैं कि उन्होंने करीब दो साल पहले सर्वाइकल कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाना शुरू किया था. उस समय कई महिलाएं इस बीमारी का नाम तक नहीं जानती थीं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लेख और जानकारी साझा कर महिलाओं को समझाना शुरू किया कि यह बीमारी क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
क्या होता है सर्वाइकल कैंसर?
डॉ प्रीति गुर्जर के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय यानी यूट्रस के मुंह पर होने वाला कैंसर होता है. यह एक गंभीर बीमारी है लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे समय रहते रोका जा सकता है. वह बताती हैं कि भारत में हर 8 से 9 मिनट में एक महिला की मौत सर्वाइकल कैंसर के कारण हो जाती है. आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 80 हजार से ज्यादा महिलाएं इस बीमारी से जान गंवा देती हैं.
वैक्सीन से हो सकता है बचाव
डॉ प्रीति गुर्जर के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन उपलब्ध है. यह वैक्सीन भारत में करीब 18 साल से मौजूद है और पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है. अब सरकार ने भी इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया है. सरकारी अस्पतालों में 14 साल तक की बेटियों को यह वैक्सीन मुफ्त में लगाई जा रही है.
किस उम्र में लगवानी चाहिए वैक्सीन?
डॉ प्रीति आगे बताती हैं कि 9 से 15 साल की उम्र की बच्चियों को इस वैक्सीन के दो टीके लगते हैं जबकि 15 से 45 साल की महिलाओं को तीन डोज दी जाती हैं. पहला टीका लगाने के बाद दूसरा करीब डेढ़ से दो महीने बाद और तीसरा छह महीने के अंदर लगाया जाता है.
महिलाओं से की खास अपील
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉ प्रीति गुर्जर ने सभी महिलाओं से अपील की है कि वे अपनी सेहत को लेकर जागरूक रहें और इस वैक्सीन को जरूर लगवाएं. उन्होंने कहा कि महिलाएं इस बीमारी को लेकर शर्म या डर महसूस न करें क्योंकि यह एक बीमारी है और किसी को भी हो सकती है. अगर समय रहते सावधानी बरती जाए, तो इससे आसानी से बचाव किया जा सकता है. डॉ प्रीति का मानना है कि अगर उनकी इस जागरूकता से किसी एक महिला की भी जान बचती है, तो इससे बड़ा काम उनके लिए कोई नहीं होगा. खंडवा की यह डॉक्टर आज कई महिलाओं के लिए उम्मीद और जागरूकता की मिसाल बन चुकी हैं.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.