झीलों की नगरी सागर में पांच दिवसीय फागोत्सव का समापन रविवार को रंगपंचमी के उल्लास के साथ हुआ। शहर के हृदय स्थल बड़ा बाजार स्थित श्रीदेव बांके राघवजी मंदिर में भक्ति और रंगों का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां भगवान ने भक्तों के साथ फूलों और प्राकृतिक रंगों से होली खेली, जिसमें पूरा परिसर फाग के सुरों से गुंजायमान हो उठा। 51 किलो फूलों के डोल में विराजे ठाकुरजी
उत्सव की शुरुआत सुबह ठाकुरजी के विशेष अभिषेक और पूजन से हुई। दोपहर 12 बजे राजभोग के बाद जब भगवान श्वेत पोशाक धारण कर गर्भगृह से बाहर आए तो भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। ठाकुरजी को 51 किलो फूलों से सजे डोल में विराजमान किया गया। मंदिर प्रबंधन द्वारा 100 लीटर टेसू के फूलों का प्राकृतिक रंग तैयार किया गया था। जिसे चांदी की पिचकारी से भक्तों पर छिड़का गया। साथ ही विशेष मशीनों के जरिए 51 किलो अबीर-गुलाल उड़ाकर पूरे माहौल को सतरंगी कर दिया गया। बुंदेली फागों पर थिरके श्रद्धालु, सुरक्षा के कड़े पहरे
भजन-कीर्तन और पारंपरिक बुंदेली फागों के बीच श्रद्धालु जमकर थिरके। वहीं, शहर की सड़कों पर युवाओं की टोलियां बुरा न मानो होली है के नारों के साथ रंग-गुलाल उड़ाती नजर आईं। बाजार में रंगों की दुकानें तो सजी थीं, लेकिन अन्य व्यापारिक संस्थान बंद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की स्पेशल टीमों ने गश्त कर शांति व्यवस्था बनाए रखी। जिससे त्योहार पूरी गरिमा और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ।
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