राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में रंग पंचमी पर ऐतिहासिक डोलचा मार होली का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर की गलियों और चौराहों पर सुबह से ही रंग-गुलाल उड़ने लगा। लोगों ने लोहे के पीपे से बने डोलचों से एक-दूसरे पर रंग और पानी की बौछार की, जिससे पूरा नगर रंगों में सराबोर हो गया। हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान में राम मंदिर धर्मशाला से सुबह करीब 11:30 बजे पारंपरिक गैर जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में भगवान श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। श्रद्धालुओं ने रथ के साथ गुलाल उड़ाया और होली खेली। जुलूस में शामिल लोगों पर मशीनों के माध्यम से भी रंगों की बौछार की गई, जिससे वातावरण उत्सवमय हो गया। बैंड-बाजों की धुन और जयकारों के बीच गैर जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकला। रियासतकाल से चली आ रही परंपरा
नरसिंहगढ़ की डोलचा मार होली रियासतकाल से चली आ रही एक अनूठी परंपरा है। इसमें लोहे के पीपे से बने डोलचों में पानी भरकर एक-दूसरे पर तेज दबाव से फेंका जाता है। पानी का प्रहार इतना तीव्र होता है कि कई बार कपड़े भी फट जाते हैं। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग नरसिंहगढ़ पहुंचते हैं। नगर में विशेष रूप से तैयार किए जाने वाले ये डोलचे 50 से 500 रुपए तक के अलग-अलग आकारों में उपलब्ध रहते हैं। नगर परिषद ने रंग पंचमी के इस आयोजन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। शहर में विभिन्न स्थानों पर पानी के टैंकर और टंकियां भरवाई गईं, ताकि होली खेलने वालों को पानी की कमी न हो। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। गैर जुलूस राम मंदिर से शुरू होकर शिवजी का चौक, दिनाजी का चौराहा, फूलबाग, चंपी चौराहा, छतरी चौराहा, मुख्य बाजार, सुभाष चौक, बर्तन बाजार, शाजापुर वाला चौराहा, छार बाग, पांडव चौराहा, बारह द्वारी, पाल रोड, थावरिया, बड़ा बाजार, रावजी का चौक, सूरज पोल, होली कट और डबलिया चौराहा से होते हुए शाम करीब 5 बजे पुनः राम मंदिर पहुंचने वाला है। रंग पंचमी के इस पारंपरिक आयोजन में पूरा नगर भक्तिमय उल्लास और रंगों के उत्सव में डूबा नजर आया। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं देते रहे और नरसिंहगढ़ की ऐतिहासिक डोलचा मार होली की परंपरा को जीवंत बनाए रखा।
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