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Basoda 2026: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला बासोड़ा, जिसे शीतला अष्टमी भी कहा जाता है, मां शीतला की पूजा का विशेष दिन होता है. इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता.
Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में माता शीतला की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. उन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. मान्यता है कि माता शीतला अपने भक्तों को विशेष रूप से त्वचा संबंधी रोगों और संक्रामक बीमारियों से बचाती हैं. इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु शीतला अष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता है. इसलिए शीतला अष्टमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, शीतला अष्टमी या बासोड़ा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाने की परम्परा हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है? आइए जानते हैं शीतला अष्टमी या बासोड़ा से जुड़ी इस मान्यता के पीछे धार्मिक कारण.
कब है शीतला सप्तमी और अष्टमी
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 9 मार्च की रात 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 11 मार्च की रात 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी. इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शाम 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. वहीं 11 मार्च को बसोड़ा या शीतला अष्टमी मनाई जाएगी.
क्यों खाया जाता है एक दिन पहले बना भोजन
शीतला अष्टमी से जुड़ी एक अनोखी और प्राचीन परंपरा भी प्रचलित है. इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और ताजा भोजन बनाने से परहेज किया जाता है. व्रत रखने वाली महिलाएं अष्टमी से एक दिन पहले यानी सप्तमी को ही विभिन्न प्रकार के पकवान और भोजन तैयार कर लेती हैं. अगले दिन उसी बने हुए भोजन को माता शीतला को अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में परिवार के साथ ग्रहण किया जाता है. इस परंपरा को “बसोड़ा” कहा जाता है. मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों से सुरक्षित रखती हैं.
बासोड़ा पर क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा?
हिंदू परंपरा में बासोड़ा के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा है. मान्यता के अनुसार, शीतला माता को ठंडा और बासी भोजन अर्पित किया जाता है. इसलिए भक्त अष्टमी से एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन ही घर में भोजन बनाकर रख लेते हैं. अगले दिन उसी ठंडे भोजन से माता शीतला को भोग लगाया जाता है और फिर पूरा परिवार उसी प्रसाद को ग्रहण करता है. धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला शीतलता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा प्रदान करने वाली देवी हैं.इसी कारण इस दिन आग जलाने या ताजा भोजन बनाने से परहेज किया जाता है. माना जाता है कि यदि इस दिन चूल्हा जलाया जाए तो माता शीतला अप्रसन्न हो सकती हैं. इसलिए श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं और ठंडे भोजन का भोग लगाकर माता से सुख, शांति और आरोग्य की कामना करते हैं.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें