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Cattle heat stress solution : गर्मियों में बढ़ता तापमान पशुओं के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. हीट स्ट्रेस के कारण दूध उत्पादन तेजी से घटता है और पशु बीमार भी पड़ सकते हैं. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म मौसम में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और हरे चारे का अचार तैयार कर पशुओं को खिलाने से न केवल उनकी सेहत बेहतर रहती है बल्कि दूध उत्पादन भी स्थिर बना रहता है.
सतना : गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पशुपालकों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं. तेज धूप, बढ़ता तापमान और हरे चारे की कमी के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस यानी गर्मी का तनाव बढ़ने लगता है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और कई बार पशु बीमार भी पड़ जाते हैं. लेकिन अगर पशुओं को सही समय पर संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और हरे चारे का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करके खिलाया जाए तो गर्मियों में भी दूध उत्पादन को स्थिर रखा जा सकता है. पशु विशेषज्ञों के अनुसार देसी तरीकों के साथ कुछ वैज्ञानिक उपाय अपनाकर पशुओं को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है.
गर्मी में क्यों घट जाता है दूध उत्पादन
लोकल 18 से बातचीत में जिला पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. बृहस्पति ने बताया कि गर्मियों में अचानक तापमान बढ़ने से पशुओं के शरीर पर सीधा प्रभाव पड़ता है. विशेष रूप से भैंसों पर इसका असर ज्यादा दिखाई देता है क्योंकि उनकी त्वचा काली होती है जो अधिक गर्मी को अवशोषित करती है इसी कारण भैंसों में हीट स्ट्रेस जल्दी देखने को मिलता है. वहीं क्रॉस ब्रीड गायें जैसे एचएफ और जर्सी मूल रूप से ठंडे क्षेत्रों की नस्लें हैं इसलिए उन्हें भी गर्मी ज्यादा प्रभावित करती है. तापमान बढ़ने से पशुओं के शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे दूध उत्पादन में काफी गिरावट देखने को मिलती है.
संतुलित पशु आहार और पानी है सबसे जरूरी
गर्मी के मौसम में पशुओं को संतुलित आहार देना बेहद जरूरी होता है. डॉ. बृहस्पति के अनुसार अगर कोई गाय रोजाना लगभग 6 लीटर दूध दे रही है तो उसे दूध उत्पादन के लिए करीब 3 किलो संतुलित आहार देना चाहिए. इसके अलावा शरीर के रखरखाव के लिए लगभग डेढ़ किलो आहार अलग से देना चाहिए. यानी एक गाय को करीब साढ़े चार किलो संतुलित आहार मिलना चाहिए. इसी तरह यदि भैंस 6 लीटर दूध दे रही है तो उसे लगभग 3 किलो आहार दूध उत्पादन के लिए और करीब 2 किलो आहार शरीर के रखरखाव के लिए देना चाहिए.
यानी कुल मिलाकर लगभग 5 किलो संतुलित आहार जरूरी होता है. इसके साथ ही पानी की मात्रा भी बढ़ानी चाहिए क्योंकि पानी का दूध उत्पादन में बहुत अहम योगदान होता है. पशुओं के सामने दिन में कम से कम तीन बार साफ पानी रखना चाहिए और बीच बीच में यह भी देखना चाहिए कि पशु पर्याप्त पानी पी रहे हैं या नहीं.
हरे चारे की अचार यानी साइलेज से मिलेगा समाधान
गर्मियों में सबसे बड़ी समस्या हरे चारे की कमी होती है. ऐसे में पशुपालकों को इसकी तैयारी पहले से करनी चाहिए. बघेलखंड क्षेत्र में वर्षों से हरे चारे को सुरक्षित रखने की एक पारंपरिक और वैज्ञानिक विधि अपनाई जाती है जिसे आम भाषा में हरे चारे का अचार या साइलेज कहा जाता है. दरअसल मक्का, ज्वार या बाजरा जैसे हरे चारे को काटकर अच्छी तरह दबाकर एयरटाइट गड्ढों या साइलो में रखा जाता है.
इसके बाद फर्मेंटेशन की प्रोसेस से यह चारा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है. इस प्रोसेस से चारे की नमी और पोषण बरकरार रहता है और यह पशुओं के लिए स्वादिष्ट भी बन जाता है. इससे पूरे साल या फिर कम से कम एक गर्मी तो पशुओं को पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराया जा सकता है.
पशुओं को खिलाने और रखने में रखें ये सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि साइलेज को दूध निकालने से लगभग दो घंटे पहले नहीं खिलाना चाहिए. बेहतर होता है कि इसे दूध दुहने के बाद ही पशुओं को दिया जाए. इससे दूध की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता. इसके अलावा गर्मियों में पशुओं को दोपहर की तेज धूप में बाहर नहीं निकालना चाहिए. उन्हें केवल सुबह और शाम के समय ही खुला छोड़ना बेहतर रहता है. डेयरी या पशु शेड में छायादार वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है. इसके लिए छत पर हरी शेड नेट या टीन की छत के नीचे घास फूस जैसी व्यवस्था की जा सकती है ताकि तापमान कम बना रहे.
यदि पशुपालक इन साधारण लेकिन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं तो गर्मियों में भी पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाया जा सकता है और दूध उत्पादन में गिरावट की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. इससे पशुपालन का व्यवसाय भी सुरक्षित और लाभदायक बना रह सकता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें