10, 20, 25 और दौड़े चले आते बछड़े, चलता है अंको का जादू, ये है गायों की गजब पाठशाला

10, 20, 25 और दौड़े चले आते बछड़े, चलता है अंको का जादू, ये है गायों की गजब पाठशाला


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Sagar Goshala: यह के बछड़ों पर अंकों का जादू चलता है. और इसके लिए जन्म होते ही इन्हें यह नाम दे दिया जाता है एक्सपर्ट बताते हैं कि थारपारकर प्रजाति के गाय बछड़ों में अंक विद्या को समझने की शक्ति अधिक होती है ऐसा हाईपोथैलेमस गुण वजह से है

Sagar Goshala: गौशालाओं में रहने वाले गाय बछड़ों को अक्सर राधा, गंगा श्याम, सरस्वती, लाल, नीली रामू श्यामू जीवन जैसे कई नामों के साथ पुकारा जाता है जो आपने देखा सुना होगा. लेकिन सागर जिले में एक ऐसी गौशाला है जहां पिछले कई सालों से गाय बछिया को अंको के नाम से पुकारा जाता है. दो-चार 10 20 25 99 215 240 300 जैसे नाम ही इनकी पहचान बने हुए हैं. यह के बछड़ों पर अंकों का जादू चलता है. और इसके लिए जन्म होते ही इन्हें यह नाम दे दिया जाता है एक्सपर्ट बताते हैं कि थारपारकर प्रजाति के गाय बछड़ों में अंक विद्या को समझने की शक्ति अधिक होती है ऐसा हाईपोथैलेमस गुण वजह से है हालांकि यह केवल अंक बोध तक ही सीमित है. कोई नया व्यक्ति जब इस तरह के नाम सुनता है तो उसका पहला शब्द यही होता है क्या यहां पर गायों की पाठशाला चलती है ?

नंबर आने का इंतजार
ऐसे ही सुबह शाम होते ही यहां के बछड़े गेट पर आकर खड़े हो जाते हैं और उन्हें अपना नंबर आने का इंतजार होता है जैसे ही ग्वाला नंबर पुकारता है तो उसमें से कोई एक बछिया जिसका नंबर होता है वह उस भीड़ को चीरते हुए गेट के पास आ जाती है ग्वाला गेट को खोलना है तो वह बछिया गेट से बाहर निकलती है और सीधा दौड़ते हुए अपनी मां के पास पहुंच जाती है जहां उसके लिए दूध पीने को मिलता है. बता दें, दूध दुहने के लिए अलग और बछड़ों को गेट से निकालने के लिए अलग-अलग ग्वाला होते हैं. गौशाला के अंदर जो दूध लगाता है और वह अंदर से आवाज देता है 55, तू वहां से करीब 200 मीटर दूर खड़ा ग्वाला बछड़ों के पास आवाज लगने लगता है 55, 55, 55 जैसे ही 55 नंबर का बछड़ा यह अंक सुनता है तो वह एक्टिव हो जाता और 100- 150 बछड़ों मैं जहां भी होता है वह रास्ता बनाते हुए गेट तक पहुंच जाता,

गाय का संरक्षण
बता दें कि यह मध्य प्रदेश का एकमात्र गोकुल ग्राम है जहां पर 1946 से थारपारकर प्रजाति की गाय का संरक्षण किया जा रहा है. वर्तमान समय में यहां पर 300 से अधिक थारपारकर प्रजाति की गाय हैं और 90 से अधिक बछड़े हैं. इन प्रजातियों की खासियत यह है कि यह है पूरी तरह से सफेद होती हैं उनके बच्चे भी सफेद होते हैं ऐसे में इनकी पहचान करना मुश्किल होता है लेकिन केयरटेकर अशोक के द्वारा जन्म होते ही कर से पांच दिन तक कान में जाकर लगातार उसका जो नंबर रहता है वह किसी गुरु मंत्र की तरह बार-बार बोला जाता है रिपीट किया जाता है जो उन वचनों के दिमाग में बैठ जाता है और उनकी पहचान बन जाता है. यहां पर 10 से ज्यादा केयरटेकर का काम कर रहे हैं उनके लिए एक-एक गाय एक-एक बछड़ा से भावनात्मक लगाव है जन्म से लेकर बड़े होने तक या नीलामी होने तक यह देखरेख में रहते हैं.

पशु संधारण केंद्र के प्रबंधक डॉक्टर राकेश गौतम बताते हैं की बड़ी संख्या में यहां पर गाय होने के बाद भी उनका मैन्युअल तरीके से ही ग्वालो के द्वारा दूध लगाया जाता है इसके लिए उनके बछड़ों के नाम अंको पर रखे जाते हैं और इन्हीं अंको से इन बछड़ों की पहचान होती है. इनमें हाईपोथैलेमस का गुण पाया जाता है जिसकी वजह से अंको को पहचान की विद्या इनके पास अधिक है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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