400 बच्चों कि एक मां, कोई बेटी बनना चाहती IPS तो कोई मिस इंडिया, कांता गोयल की गजब कहानी

400 बच्चों कि एक मां, कोई बेटी बनना चाहती IPS तो कोई मिस इंडिया, कांता गोयल की गजब कहानी


Ujjain News: मां केवल जन्म देने वाली ही नहीं होती, बल्कि अपने प्यार और स्नेह से जीवन पालन और उसे संवारने वाली भी मां ही होती है. उज्जैन की कांता सुधीर भाई गोयल भी ऐसी ही ममतामयी मां हैं, जिनका स्नेह 400 से अधिक बच्चों तक पहुंच चुका है. सेवा धाम आश्रम में रहने वाले अनाथ, दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के लिए वह सहारा ही नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुकी हैं. महिला दिवस पर जानिए इस अनोखी मां की प्रेरणादायक कहानी, जिनका मातृत्व सच्ची सेवा और ममता से भरा है.

सेवा और ममता का अनूठा संगम
उज्जैन से करीब 20 किलोमीटर दूर अंबोदिया गांव में स्थित अंकित सेवा धाम आश्रम मानव सेवा की अनोखी मिसाल है. यहां 1100 से ज्यादा दिव्यांग, अनाथ, जरूरतमंद और असहाय लोग आश्रय पाते हैं. इस आश्रम की सबसे खास पहचान हैं कांता गोयल, जिन्हें यहां रहने वाले 400 से अधिक बच्चे प्यार से “मां” कहकर बुलाते हैं. भले ही इन बच्चों का उनसे खून का रिश्ता न हो, लेकिन उनका स्नेह और ममता किसी सगी मां से कम नहीं है. कांता गोयल अपने प्यार, देखभाल और संस्कारों से इन बच्चों के जीवन में उम्मीद और उजाले की नई किरण जगा रही हैं.

कैसे बनीं 400 बच्चों की मां?
उज्जैन की कांता सुधीर गोयल की कहानी ममता और सेवा का अनोखा उदाहरण है. बचपन में अपने बच्चे को खोने का गहरा दुख झेलने के बाद उन्होंने खुद को सेवा के रास्ते पर समर्पित कर दिया. आज वे सेवा धाम आश्रम में करीब 400 बच्चों की देखभाल कर रही हैं. कांता गोयल कहती हैं कि उनकी सिर्फ दो नहीं, बल्कि सौ बेटियां और सैकड़ों बच्चे हैं. बच्चों की हंसी-खुशी ही अब उनकी दुनिया बन चुकी है. छोटे बच्चों को गोद में खिलाना, उन्हें स्नेह देना और बड़े बच्चों को पढ़ाई-लिखाई व अच्छे संस्कार देकर आत्मनिर्भर बनाना ही उनका उद्देश्य है.

परिवार मे सभी सेवा में जुटे
उज्जैन में कांता सुधीर गोयल के इस सेवा कार्य में उनका पूरा परिवार कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता है. उनके पति सुधीर भाई गोयल हर कदम पर सहयोग करते हैं, जबकि उनकी दोनों बेटियां भी इस मिशन को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. बड़ी बेटी गोरी ने इवेंट मैनेजमेंट में एमबीए किया है और छोटी बेटी मोनिका ने समाज कार्य में मास्टर डिग्री हासिल की है. दोनों बहनें अपनी मां के साथ मिलकर आश्रम के बच्चों की देखभाल करती हैं और उन्हें परिवार जैसा स्नेह देती हैं, ताकि हर बच्चे को शिक्षा, संस्कार और बेहतर भविष्य मिल सके.

अनाथ बच्चों के सपने को सलाम
सेवा धाम आश्रम की रानी सुधीर बाई गोयल ने बताया कि 3 साल की उम्र में यहां आई थी. अब उसकी उम्र 21 साल हो चुकी है. अभी वह 12वीं मे है. कहा, ”मेरा सपना है कि मैं IPS बनूं. इसके लिए दिन रात मेहनत करती हूं. मेरी मां कांता सुधीर गोयल मुझे बहुत अच्छे से पढ़ाती हैं. मुझे कोई कठिनाई आती है तो मैं सबसे पहले उनसे ही पूछती हूं. वह मुझे बहुत प्यार से समझाती हैं. वह कोई भी बात मुझे समझाती हैं, फिर मैं उसे कभी नही भूलती. मुझे पता है कि वह मेरी रियल मां नहीं, लेकिन मैं गर्व से कहती हूं कि मां के रूप में वह भगवान हैं”.

डॉक्टर बनकर यहीं सेवा करूंगी…
सेवा धाम में रहने वाली अन्य छात्रा अवंतिका सुधीर बाई गोयल ने बताया, ”जब मेरी उम्र केवल एक दिन की थी, तब मैं यहां लाई गई थी. आज मेरी उम्र 18 वर्ष है. मैं 10वीं में पढ़ रही हूं. मेरा सपना है कि मैं अच्छी डॉ. बनूं. जिस दिन मेरा यह सपना पूरा हो जाएगा, उस दिन मैं यहां पर ही बच्चों की सेवा मे जुट जाऊंगी”. वहीं एक बेटी जिसका नाम पायल है, उम्र लगभग 15 वर्ष है, का कहना है कि बचपन से ही मुझे मॉडलिंग का शौक है. मेरा सपना है कि मैं एक दिन मिस इंडिया बनूं. इसके लिए मैं पढ़ाई के साथ-साथ मॉडलिंग की प्रैक्टिस भी करती हूं.



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