बाहर काम करने जा रहे लोग, गांव में मजदूर कम: बुरहानपुर में मशीनों से कटवाना पड़ रही गेहूं की फसल – Burhanpur (MP) News

बाहर काम करने जा रहे लोग, गांव में मजदूर कम:  बुरहानपुर में मशीनों से कटवाना पड़ रही गेहूं की फसल – Burhanpur (MP) News




बुरहानपुर जिले में हर साल बड़े पैमाने पर ग्रामीण मजदूरों का दूसरे राज्यों में पलायन होता है। इस वर्ष भी मजदूरों की कमी के कारण किसानों को खेतों में गेहूं कटाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में कई किसान अब मशीनों का उपयोग कर रहे हैं। नेपानगर तहसील के ग्रामीण इलाकों में गेहूं कटाई का काम जोरों पर है, लेकिन मजदूरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण मजदूरों का रोजगार की तलाश में शहरों की ओर बढ़ता पलायन इसका मुख्य कारण है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पहले खेती-किसानी के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध होते थे। गेहूं, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों की बुआई से लेकर कटाई तक का अधिकांश काम मजदूरों द्वारा ही किया जाता था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में बेहतर रोजगार, अधिक मजदूरी और स्थायी काम की तलाश में कई ग्रामीण मजदूर इंदौर, सूरत और मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। शहरों में निर्माण कार्य, फैक्ट्रियों और अन्य क्षेत्रों में काम के अधिक अवसर मिलने के कारण ग्रामीण मजदूर वहां जाना पसंद कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, गांवों में खेतों में काम करने वाले मजदूरों की संख्या लगातार घट रही है, जिसका सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ रहा है। ग्राम घाघरला के किसानों ने बताया कि फसल तैयार होने के बाद उसकी समय पर कटाई अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मजदूरों की अनुपलब्धता के कारण कटाई में देरी होने से आंधी, बारिश या अन्य मौसमी आपदाओं से फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए अब किसान गेहूं काटने वाली मशीनों और अन्य आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। किराए पर लेना पड़ती है मशीन
मशीनों के उपयोग से कम समय में अधिक क्षेत्र की कटाई संभव हो जाती है, जिससे किसानों को राहत मिल रही है। हालांकि छोटे किसानों को मशीन किराए पर लेना पड़ता है। समय पर कटाई के लिए यह एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है, लेकिन इसमें भी खर्च होता है।



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