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सीधी के संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों के सामने दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया. दबंग नर बाघ T-67 ने बाघिन T-40 के तीन महीने के शावक पर हमला कर उसे मार दिया और बाद में खा गया. बाघिन अपने बच्चे को बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन वह असफल रही. इस घटना के बाद सफारी को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा था. ऐसा नजारा जंगल के क्रूर नियम को दिखाता है. वन्यजीव विशेषज्ञ इसे टेरिटरी और प्रजनन से जुड़ा प्राकृतिक व्यवहार मानते हैं.
सीधी. जिले के संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व में दिल दहला देने वाली घटना घटी जब जंगल सफारी पर आए पर्यटकों के सामने दबंग नर बाघ T-67 ने बाघिन T-40 के तीन शावकों में से एक पर अचानक हमला कर दिया. करीब तीन महीने के नन्हे शावक को बाघ ने जबड़ों में दबोचा. घसीटा और जंगल की गहराई में ले गया. पर्यटक और गाइड कुछ समझ पाते. तब तक मामला खत्म हो चुका था. थोड़ी देर बाद बाघ उसी शावक को खाते हुए दिखा. यह दृश्य जंगल के क्रूर नियम को बेनकाब करता है. जहां प्रकृति अपना संतुलन खुद बनाए रखती है. घटना के बाद वन विभाग ने कुछ घंटों के लिए सफारी रोक दी. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं दुर्लभ हैं. लेकिन पूरी तरह असामान्य नहीं. अब बताया जा रहा है कि T-67 पहले भी ऐसा कर चुका है.
वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि मां बाघिन T-40 ने अपने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की. वह हमलावर बाघ के पीछे भागी. लेकिन T-67 की ताकत के आगे हार माननी पड़ी. दरअसल उस वक्त बाघिन अपने तीनों शावकों को सुरक्षित जगह पर ले जा रही थी. उसे T-67 का खूंखार होना और शावकों को मारकर खा जाने की आशंका थी. वह उस स्थान से दूर जाना चाहती थी कि तभी अचानक T-67 ने झपट्टा मारा. सफारी वाहनों में बैठे पर्यटकों ने यह सब अपनी आंखों से देखा. हड़कंप मच गया. किसी को यकीन नहीं था कि T-67 सबके सामने ऐसा कर देगा. वह नजारा ही ऐसा था कि लोग सिहर उठे. सफारी में कुछ समय के लिए सन्नाटा और शोक छा गया. नन्हें शावक की दर्दनाक मौत से आंखों में आंसू आ गए.
सबसे आक्रामक और दबंग नर बाघ, टेरिटरी पर कब्जा मजबूत
T-67 का खूंखार इतिहास वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि T-67 इस इलाके का सबसे आक्रामक और दबंग नर बाघ है. पहले भी उसने कई बार अन्य बाघों के शावकों पर हमला किया है. विशेषज्ञों के अनुसार नर बाघ अक्सर दूसरे नर से जन्मे शावकों को मार देते हैं. इसका मकसद टेरिटरी पर कब्जा मजबूत करना और जल्दी प्रजनन का मौका पाना होता है. इसी वजह से रिजर्व में इस बाघ की हरकतों पर लगातार नजर रखी जाती है. प्रकृति का क्रूर नियम वन्यजीव जानकार बताते हैं कि यह व्यवहार कितना भी क्रूर लगे. लेकिन बाघों की जिंदगी का हिस्सा है. बड़े नर बाघ अपने इलाके पर प्रभुत्व बनाए रखने के लिए प्रतिद्वंद्वी या उनके बच्चों को खत्म करने की कोशिश करते हैं. बाघिन तब तक नए बच्चे नहीं पैदा करती. जब तक पुराने शावक बड़े नहीं हो जाते. शावकों की मौत से बाघिन जल्दी मेटिंग के लिए तैयार हो जाती है. जंगल में शावकों की ज्यादातर मौतें इसी टेरिटरी की लड़ाई का नतीजा होती हैं. यह प्रकृति का तरीका है. जिससे आबादी संतुलित रहती है.
नेशनल पार्क 2006 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व
संजय-दुबरी: बाघों का मजबूत ठिकाना मध्य प्रदेश के सीधी जिले में फैला संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व घने जंगलों. पर्याप्त पानी और ढेर सारे शिकार से भरा है. यह इलाका बाघों के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल है. मध्य भारत के टाइगर कॉरिडोर का हिस्सा होने से यहां बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इतिहास और विकास 1975 में इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया. 2006 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व बना. कोर और बफर क्षेत्र मिलाकर कुल 1675 वर्ग किलोमीटर में फैला यह रिजर्व बाघों को सुरक्षित घर देता है. बेहतर संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की वजह से यहां बाघों की आबादी लगातार बढ़ रही है. बढ़ती संख्या और चुनौतियां 2018 में यहां सिर्फ चार बाघ परिवार थे. 2023 तक यह संख्या करीब 40 पहुंच गई. विशेषज्ञ मानते हैं कि अच्छा संरक्षण और शिकार की उपलब्धता ने इसे बाघों का मजबूत अड्डा बनाया है. लेकिन संख्या बढ़ने से टेरिटरी की लड़ाई और ऐसी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. फिर भी यह जंगल का संतुलन है. प्रकृति यहां अपना खेल खेलती रहती है. जहां हर जीव अपनी जगह बनाता है. संजय-दुबरी बाघों की बढ़ती कहानी का जीता-जागता सबूत है. जो हमें जंगल के नियमों की याद दिलाता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें