केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मंगलवार को एमपी में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को 4-लेन डेवलप करने की मंजूरी दी है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मोड पर लगभग 3,839.42 करोड़ रुपए की लागत से पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एनएच752D पर बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी सेक्शन के फोर लेन निर्माण की मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कैबिनेट का आभार व्यक्त किया है। निर्माण कार्य 24 महीनों में पूरा करने का टारगेट कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने एनएच-752डी के बदनावर–पेटलावद–थांदला–टिमरवानी सेक्शन पर 80.45 किलोमीटर लंबे 4-लेन कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दी है। परियोजना का निर्माण कार्य 24 महीनों में पूरा करने का टारगेट रखा गया है। इस कॉरिडोर से उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के टिमरवानी इंटरचेंज से सीधा संपर्क मिलेगा। इस 4-लेन परियोजना के पूरे होने के बाद यात्रा अवधि में एक घंटे की कमी आ जाएगी। बताया गया कि उज्जैन–बदनावर का 70.40 किमी लंबा हिस्सा पहले ही 2-लेन से 4-लेन में अपग्रेड किया जा चुका है। वहीं बदनावर–टिमरवानी खंड वर्तमान में 5.5 मीटर चौड़ा इंटरमीडिएट लेन है, जिसकी ज्योमेट्री खराब है और यहां वाहनों की गति केवल 20–50 किमी प्रति घंटा रहती है। इसको अपग्रेड करने से उज्जैन से टिमरवानी इंटरचेंज तक 80–100 किमी प्रति घंटा की गति वाले सीधे 4-लेन मार्ग की सुविधा मिल जाएगी। आवागमन के लिए छोटा मार्ग, कुंभ में मिलेगी मदद बताया गया कि टिमरवानी-थांदला-पेटलावद-बदनावर-उज्जैन कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने वाले यातायात के लिए सबसे छोटा मार्ग है। टिमरवानी–बदनावर खंड के उन्नयन से अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यातायात सुचारु होगा। साथ ही अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी। इससे यात्रा समय, ट्रैफिक जाम और संचालन लागत में कमी आएगी। सीएम बोले- सीधी फोर लेन कनेक्टिविटी मिलेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के टिमरवानी इंटरचेंज तक सीधी फोर लेन कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह एक महत्वपूर्ण प्रकल्प होगा। इससे जहां इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास के औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच सुगम होगी। वहीं, धार एवं झाबुआ जिले का समग्र आर्थिक विकास भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह स्वीकृति इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इससे सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।
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