न रोड टैक्स, न रजिस्ट्रेशन फीस, नई ईवी पॉलिसी में कार खरीदारों की मौज!

न रोड टैक्स, न रजिस्ट्रेशन फीस, नई ईवी पॉलिसी में कार खरीदारों की मौज!


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दिल्ली सरकार नई EV Policy 2.0 लाने की तैयारी में है, जिसका मकसद शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देना है. प्रस्तावित नीति के तहत दोपहिया और चौपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी बढ़ाने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने पर जोर दिया गया है.

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नई दिल्ली. दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने की योजना बना रही है. इसी दिशा में दिल्ली सरकार मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहन नीति को और मजबूत बनाते हुए EV Policy 2.0 लाने की तैयारी कर रही है. यह नई नीति शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए ज्यादा आक्रामक लक्ष्य और प्रोत्साहन देने पर केंद्रित होगी. 2020 में लागू की गई मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहन नीति को कई बार बढ़ाया जा चुका है और अब इसकी अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई है. नई नीति के लिए तैयार मसौदा अभी सार्वजनिक परामर्श और समीक्षा की प्रक्रिया में है और उम्मीद की जा रही है कि इसे वित्त वर्ष 2026 से लागू किया जा सकता है.

नई नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाना है. मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक 2027 तक दिल्ली में नए वाहन पंजीकरण का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों का करने का लक्ष्य रखा गया है. यह लक्ष्य 2020 की नीति में तय 25 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ज्यादा महत्वाकांक्षी माना जा रहा है.

इलेक्ट्रिक दोपहिया पर ज्यादा फोकस

नई नीति में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने की योजना है. प्रस्ताव के मुताबिक इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर करीब 21,000 रुपये की सब्सिडी दी जा सकती है. महिला खरीदारों के लिए यह प्रोत्साहन बढ़ाकर करीब 30,000 रुपये तक करने का प्रस्ताव भी रखा गया है. सरकार का लक्ष्य दिल्ली में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की संख्या को करीब 12 लाख तक पहुंचाने का है.

इलेक्ट्रिक कारों पर भी सब्सिडी

इलेक्ट्रिक 4 व्हीलर्स वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी नई योजना बनाई जा रही है. प्रस्ताव के मुताबिक बैटरी क्षमता के आधार पर प्रति किलोवाट घंटा 10,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये प्रति वाहन तक हो सकती है.

पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने की योजना

नई नीति में एक नया प्रस्ताव यह भी है कि पेट्रोल या डीजल से चलने वाले पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर प्रोत्साहन दिया जाए. इसके तहत ऐसे वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर करीब 50,000 रुपये तक की सहायता देने का सुझाव दिया गया है. यह योजना शुरुआत में सीमित संख्या में वाहनों के लिए लागू की जा सकती है.

अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा

नई नीति में तीनपहिया, लाइट कमर्शियल वाहन और ट्रकों को भी इलेक्ट्रिक बनाने पर जोर दिया गया है.

  • इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर के लिए प्रोत्साहन जारी रहने की संभावना है.
  • इलेक्ट्रिक लाइट कमर्शियल वाहनों पर करीब 75,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है.
  • बैटरी से चलने वाले ट्रकों को भी बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन पर विचार किया जा रहा है.

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

नई नीति का एक बड़ा हिस्सा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से जुड़ा है. सरकार मोहल्ला स्तर पर चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने और प्रमुख सड़कों जैसे रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर फास्ट चार्जिंग कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है. इसके साथ ही बैटरी स्टोरेज सिस्टम की क्षमता को भी 2030 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.

स्क्रैपेज और अन्य लाभ

नई नीति में पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने पर भी जोर दिया गया है.इसके तहत स्क्रैपेज प्रोत्साहन देने, नए इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट जारी रखने जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है. साथ ही एक समर्पित राज्य EV फंड बनाने की भी योजना है, जिससे इन प्रोत्साहनों को वित्तीय मदद मिल सके.

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Jai Thakur

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें



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