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Ujjain Chintaman Ganesh Temple: उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर में इस बार चैत्र मास में पांच बुधवार होने से पांच जत्रा लगेगी. इसकी शुरुआत हो चुकी है. आज दूसरी जत्रा पर श्रद्धालुओं की सुबह से ही मंदिर मे भीड़ लगी है. जानें ये अनोखी परंपरा…
Ujjain News: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में आस्था और परंपराओं की खास झलक देखने को मिलती है. चैत्र मास के दौरान प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर में हर बुधवार जत्रा यानी यात्रा निकालने की पुरानी परंपरा है. इसी क्रम में आज देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचे. मंदिर परिसर भक्तों से गूंज उठा. इस अवसर पर कई किसानों ने अपनी नई फसल भगवान गणेश को अर्पित कर समृद्धि और खुशहाली की कामना भी की.
दरअसल, यह मंदिर उज्जैन के चिंतामन पर रोड पर है. यह मंदिर शहर से करीब किलोमीटर दूर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर पर चैत्र के सभी बुधवार को जत्रा का महत्व माना जाता है. इसी परंपरा के चलते आज दूसरी जत्रा पर प्रातः 4 बजे पुजारी ने मंदिर के पट खोलकर 11 फलों के रस से गणेश जी का पंचामृत अभिषेक किया. फिर सिंदूर से आकर्षक श्रृंगार किया. इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए गए. जत्रा होने के कारण बड़ी संख्या में सुबह से श्रद्धालु पहुंचने लगे. हालात ये थे कि दोपहर तक श्रद्धालुओं की कतारें देखी गईं. जत्रा को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम भी किए.
मंदिर की ये मान्यता
उज्जैन के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर में सिद्धि विनायक, चिंतामन और इच्छापूर्ति गणेश की प्रतिमाएं स्थापित हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इनकी स्थापना भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण जी ने की थी और चैत्र मास में यहां पूजन किया था. मान्यता है कि चैत्र माह के हर बुधवार को यहां दर्शन करने से पूरे वर्ष के दर्शन का पुण्य मिलता है. भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि जत्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.
क्यों करते हैं धान अर्पित?
मंदिर के शंकर पुजारी के अनुसार, चैत्र मास में अमूमन चार बुधवार को जत्रा निकलती है, लेकिन हर तीन साल बाद चौथे वर्ष यह संख्या बढ़कर पांच हो जाती है. इस बार चौथा साल होने के कारण पांच जत्राएं आयोजित की जाएंगी. जत्रा के इन खास बुधवारों पर मालवा क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. खासतौर पर किसान अपनी नई फसल भगवान गणेश को अर्पित कर अच्छी पैदावार और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं.
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