टीकमगढ़ नगर पालिका में कचरा निपटारे के नाम पर 65 लाख रुपए के भुगतान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार ने इस बिल में गड़बड़ी का अंदेशा जताते हुए भुगतान पर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि अधिकारी उन पर पैसा जारी करने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन बिना सबूतों के वे फाइल आगे नहीं बढ़ाएंगे। अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार के मुताबिक, 1798 टन कचरा जबलपुर भेजने के बदले यह भुगतान मांगा गया था। लेकिन जब उन्होंने फाइल चेक की, तो उसमें कचरा ढोने वाली गाड़ियों के नंबर, टोल प्लाजा की रसीदें और धर्म कांटे (वजन) की पर्चियां गायब थीं। उन्होंने साफ कर दिया है कि सिर्फ एक लेटर के आधार पर लाखों का भुगतान नहीं किया जा सकता। करोड़ों की मशीनें बनीं शोपीस शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड (कचरा घर) की हालत भी काफी खराब है। वहां कचरा छांटने और प्लास्टिक रीसाइकिल करने के लिए करोड़ों की मशीनें तो लगी हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन न होने की वजह से वे सालों से बंद पड़ी हैं। हालत यह है कि मशीनों के चारों ओर कचरे के ऊंचे ढेर लगे हुए हैं और बिजली के खंभे होने के बावजूद काम ठप है। प्रदूषण और प्लास्टिक की समस्या शहर से रोजाना 10-12 टन कचरा निकलता है, जिसमें प्रतिबंधित पॉलिथीन की मात्रा बहुत ज्यादा है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि अक्सर इस कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे उठने वाले धुएं और बदबू से जीना दूभर हो गया है। कचरा निपटारे के लिए करीब 5 करोड़ की योजना मंजूर हुई थी, जिसका ठेका 3.17 करोड़ में एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया था। अधिकारियों का पक्ष ट्रेंचिंग ग्राउंड के प्रभारी इंजीनियर अजय दीक्षित का कहना है कि अध्यक्ष के फाइल रोके जाने के बाद ठेकेदार को नोटिस जारी कर जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। फिलहाल, जब तक गाड़ी नंबर और रसीदें नहीं मिल जातीं, तब तक भुगतान अटका रहेगा।
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