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Agriculture News: कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने कहा कि यदि किसान इंटरक्रॉपिंग पद्धति को सही तरीके से अपनाएं, तो सब्जी की खेती से जबरदस्त मुनाफा कमाया जा सकता है. किसानों को ऐसी दो फसलें चुननी चाहिए, जिनमें एक जल्दी तैयार हो जाए और दूसरी थोड़ी देर से तैयार हो.
सीधी. मध्य प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई तकनीकों और फसल प्रबंधन के तरीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इसी कड़ी में भिंडी के साथ धनिया की इंटरक्रॉपिंग यानी एक ही खेत में दो फसलों की खेती किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प बनकर उभर रही है. इस तरीके से न केवल किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलती है बल्कि जमीन का बेहतर उपयोग होता है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. सीधी के कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि मार्च का महीना सब्जी की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय न ज्यादा ठंड रहती है और न ही तेज गर्मी पड़ती है, जिससे सब्जियों की बढ़वार तेजी से होती है. यही कारण है कि मार्च में बोई गई सब्जियां जल्दी तैयार होकर बाजार तक पहुंच जाती हैं.
भिंडी और धनिया की इंटरक्रॉपिंग खेती किसानों को एक ही खेत से दोहरी कमाई का मौका देती है. भिंडी की कतारों के बीच खाली जगह में धनिया की बुवाई की जाती है. इससे खेत का कोई भी हिस्सा खाली नहीं रहता और उत्पादन भी बढ़ जाता है. साथ ही किसानों को फसल चक्र की जटिलता से भी काफी हद तक राहत मिलती है. भिंडी और धनिया दोनों ही ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी मांग पूरे साल बाजार में बनी रहती है. धनिया लगभग हर सब्जी में इस्तेमाल होने के कारण रोजाना बिकता है जबकि भिंडी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की पसंदीदा सब्जियों में शामिल है. ठंड से गर्मी की ओर बढ़ते मौसम में इन दोनों फसलों की ग्रोथ अच्छी होती है, जिससे पैदावार भी बेहतर मिलती है.
इंटरक्रॉपिंग पद्धति से जबरदस्त मुनाफा
कृषि सलाहकार अवनीश पटेल के अनुसार, यदि किसान इंटरक्रॉपिंग पद्धति को सही तरीके से अपनाएं, तो सब्जी की खेती से जबरदस्त मुनाफा कमाया जा सकता है. उनका कहना है कि किसानों को ऐसी दो फसलें चुननी चाहिए, जिनमें एक जल्दी तैयार हो जाए और दूसरी थोड़ी देर से तैयार हो. इससे पहली फसल से लागत निकल जाती है और दूसरी फसल से सीधा मुनाफा होता है. वहीं खेती की तकनीक की बात करें, तो भिंडी की बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी लगभग दो फीट और पौधे से पौधे की दूरी करीब एक फीट रखनी चाहिए. भिंडी की दो कतारों के बीच जो खाली जगह बचती है, उसी में धनिया की बुवाई कर दी जाती है. इस तरीके से खेत की पूरी जमीन का बेहतर उपयोग हो जाता है.
30 से 35 दिनों में तैयार फसल तैयार
धनिया की फसल लगभग 30 से 35 दिनों में तैयार हो जाती है और हरे धनिये की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण किसानों को तुरंत आमदनी मिल जाती है. इसके बाद भिंडी करीब 50 से 55 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है, यानी भिंडी आने से पहले ही किसान धनिया बेचकर कमाई कर लेता है और फिर भिंडी की नियमित तुड़ाई से लगातार आय मिलती रहती है. अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कीट नियंत्रण पर ध्यान देना जरूरी है. साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करना भी महत्वपूर्ण होता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.