हरदा जिले में गर्मी के मौसम में खेतों में नरवाई (फसल के अवशेष) जलाने पर प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी खेत में आग लगाई गई, तो सैटेलाइट इमेज से प्रशासन को तुरंत पता चल जाएगा और संबंधित किसान पर पुलिस कार्रवाई के साथ ही अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया जाएगा। नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों और किसानों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से सभी किसानों से खेतों में नरवाई न जलाने की विशेष अपील की गई है। बैठक में एसपी शशांक, जिला पंचायत सीईओ अंजली जोसेफ जोनाथन, डीएफओ ज्योति मुड़िया और किसान संघ अध्यक्ष महेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। नरवाई जलाने से नष्ट होते हैं पोषक तत्व अधिकारियों ने बताया कि नरवाई जलाने से खेत की भूमि की ऊपरी परत में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इससे जमीन कठोर हो जाती है और उसकी जलधारण क्षमता कम होने के कारण फसलें जल्दी सूखने लगती हैं। इसके अलावा, धरती गर्म होने से कार्बन-नाइट्रोजन का अनुपात बिगड़ जाता है और केंचुओं की संख्या कम होने से भूमि में वायु संचार घट जाता है। कृषि यंत्रों और डीकंपोजर का करें उपयोग किसानों को नरवाई खत्म करने के लिए कंबाइन हार्वेस्टर, भूसा बनाने की मशीन और रोटावेटर या कल्टीवेटर से जुताई करने की सलाह दी गई है। हैप्पी सीडर और जीरो टिलेज तकनीक का इस्तेमाल कर खड़ी नरवाई में ही गेहूं, मूंग और उड़द जैसी फसलें बोई जा सकती हैं। किसान बेस्ट डीकंपोजर का उपयोग कर नरवाई को जैविक खाद में बदल सकते हैं। इसकी अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र हरदा से संपर्क किया जा सकता है। पानी के टैंकर बनेंगे मिनी दमकल वाहन गर्मी में ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिए कलेक्टर ने सभी ग्राम पंचायतों को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गांवों में उपलब्ध पानी के टैंकरों में डीजल पंप लगाकर उन्हें छोटे अग्निशमन वाहन (दमकल) के रूप में उपयोग करने को कहा गया है। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि आग बुझाने के लिए डीजल पंप में प्रेशर नोजल का इस्तेमाल किया जाए और इन वाहनों को हमेशा चालू हालत में रखा जाए।
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