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Satna News: मटका विक्रेता शिवम केशरवानी ने लोकल 18 को बताया कि इस बार मटकों के दाम पिछले साल के मुकाबले थोड़े बढ़े हैं. मटकों की कीमत में लगभग 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है जबकि सुराही और कुछ अन्य मिट्टी के बर्तनों के दाम पहले जैसे ही हैं.
सतना. मध्य प्रदेश के सतना में गर्मी की आहट के साथ ही पारंपरिक मटकों का बाजार फिर से सजने लगा है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोग ठंडे और प्राकृतिक पानी की तलाश में मिट्टी के मटकों की ओर रुख कर रहे हैं. शहर के अलग अलग इलाकों में कुम्हार अपने हाथों से बनाए मटके, सुराही और घड़े लेकर बैठ गए हैं. मिट्टी की सोंधी खुशबू और ठंडे पानी की ताजगी लोगों को अपनी ओर खींच रही है, जिसके चलते बाजारों में अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है. खास बात यह है कि इस बार मटकों के नए डिजाइन और आकार लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे बाजार की रौनक भी बढ़ गई है और कुम्हारों के चेहरे पर भी खुशी साफ नजर आ रही है. शहर के पन्ना रोड, बस स्टैंड, सिटी कोतवाली के पास अग्रसेन चौराहा और रीवा रोड जैसे प्रमुख इलाकों में मिट्टी के बर्तनों का बाजार लगना शुरू हो गया है. इन स्थानों पर कुम्हार अपनी पारंपरिक कला के साथ मटके, सुराही, घड़े और अन्य मिट्टी के बर्तन बेचते नजर आ रहे हैं. गर्मी के मौसम में लोग फ्रिज के ठंडे पानी के बजाय मटके के प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक पानी को ज्यादा पसंद करते हैं, इसलिए जैसे ही तापमान बढ़ता है मटकों की मांग भी बढ़ जाती है.
लोकल 18 से बातचीत में मटका विक्रेता शिवम केशरवानी ने बताया कि इस साल मटकों के दाम पिछले साल के मुकाबले थोड़े बढ़े हैं. मटकों की कीमत में करीब 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है जबकि सुराही और कुछ अन्य मिट्टी के बर्तनों के दाम लगभग पहले जैसे ही हैं. उन्होंने बताया कि गर्मी की शुरुआत के साथ ही बाजार में ग्राहकों की संख्या धीरे धीरे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में बिक्री और तेज होने की उम्मीद है.
मिट्टी के बर्तनों की बढ़ी विविधता
इस बार बाजार में केवल मटके ही नहीं बल्कि कई तरह के मिट्टी के बर्तन भी देखने को मिल रहे हैं. दुकानों पर गुल्लक, सकोरे, छोटे घड़े, दीया बर्तन, सुराही और नल वाले मटके जैसी कई चीजें उपलब्ध हैं. अलग-अलग आकार और डिजाइन के कारण लोग अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार बर्तन खरीद रहे हैं, खासकर नल वाले मटके और डिजाइनर सुराही युवाओं और परिवारों के बीच ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं.
30-40 रुपये में ले जाएं मटका
विक्रेताओं के अनुसार, छोटे मटकों की कीमत इस साल 30 से 40 रुपये के बीच है जबकि मध्यम आकार के मटके करीब 50 रुपये तक मिल रहे हैं. रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले बड़े मटकों की कीमत 120 से 150 रुपये तक बताई जा रही है. इसके अलावा लगभग दो लीटर क्षमता वाला कलसा करीब 50 रुपये तक में उपलब्ध है, जिससे आम लोगों के लिए इन्हें खरीदना आसान हो जाता है.
पीढ़ियों से जुड़ा पारंपरिक रोजगार
सिटी कोतवाली के पास करीब 40 वर्षों से मटके बेच रही एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि यह काम उनके परिवार की पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है. आज उनके परिवार के कई सदस्य इसी व्यवसाय से जुड़े हैं और गर्मी का मौसम उनके लिए सबसे ज्यादा कमाई का समय होता है. उनका कहना है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, वैसे-वैसे मटकों की बिक्री भी बढ़ेगी और यही उम्मीद कुम्हारों के लिए इस मौसम को खास बना देती है. इस तरह गर्मी की शुरुआत के साथ ही सतना में मटकों का बाजार एक बार फिर जीवंत हो उठा है. मिट्टी की खुशबू, पारंपरिक कला और ठंडे पानी की चाहत लोगों को इन बाजारों तक खींच ला रही है, जिससे स्थानीय कुम्हारों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.