सुपर स्पेशिएलिटी में 600 रुपए की ओपीडी का प्रस्ताव: 10 रुपए की ओपीडी नहीं संभल रही, हर 17वां मरीज बीच में छोड़ रहा इलाज – Indore News

सुपर स्पेशिएलिटी में 600 रुपए की ओपीडी का प्रस्ताव:  10 रुपए की ओपीडी नहीं संभल रही, हर 17वां मरीज बीच में छोड़ रहा इलाज – Indore News




एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी और स्कूल ऑफ आई में अप्रैल से शाम को 600 रु. फीस लेकर ओपीडी शुरू करने के प्रस्ताव से वहां के डॉक्टर ही सहमत नहीं हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि एमवाय की मौजूदा 10 रुपए वाली ओपीडी में ही तमाम दिक्कते हैं। स्थिति यह है कि हर 17वां मरीज बीच में ही इलाज छोड़कर चला जाता है। 11 माह में 3751 मरीज अधूरा इलाज कर चले गए। ज्यादातर मामलों में इलाज से असंतोष की बात सामने आई है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि पिछले 11 महीनों में हर 16 में से 1 मरीज इलाज बीच में ही छोड़ रहा है। मार्च 2025 से जनवरी 2026 के बीच सामने आए इन मामलों को अस्पताल में लामा (LAMA) कहा जाता है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार समय पर सीनियर डॉक्टर नहीं मिलना, इलाज में देरी और दवाओं की कमी जैसी समस्याओं के कारण मरीज मजबूरी में इलाज बीच में छोड़कर दूसरे अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। क्या होता है लामा
LAMA का मतलब ‘Left Against Medical Advice’ (चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध अस्पताल छोड़ना) होता है। जब कोई मरीज डॉक्टरों की सलाह या इलाज पूरा होने से पहले ही अस्पताल छोड़कर चला जाता है, तो उसे ‘लामा’ (LAMA) घोषित कर दिया जाता है। 11 महीने, 60377 कुल मरीज 3751 लामा हुए केस… मार्च 2025 से जनवरी 2026 तक कुल 60,377 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 3,751 मरीज यानी लगभग 6.21% मरीज इलाज बीच में छोड़कर (LAMA) चले गए। यानी लगभग हर 16 में से 1 मरीज इलाज बीच में छोड़कर चला गया। केस-1
रेखा सिंह की देवरानी मोनिका का तीन माह से इलाज चल रहा है। डॉक्टर दवाएं लिखते हैं, लेकिन अस्पताल में नहीं मिलतीं। केस-2
शमीना खान को गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत थी। डॉक्टर ने 4 दवाएं लिखीं, लेकिन अस्पताल में 2 ही दवाएं मिलीं। केस-3
पुष्पांजलि ने गायनिक समस्या के लिए डॉक्टर को दिखाया। पर्ची में 5 दवाएं लिखी गईं, अस्पताल में सिर्फ 1 दवा ही मिली। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. वीपी पांडे, पूर्व डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज लामा की स्थिति तब बनती है जब डॉक्टर और मरीज के बीच संवाद ठीक नहीं होता, मरीज का अस्पताल पर भरोसा कम हो जाता है या उसे लगता है कि सही इलाज नहीं मिल रहा। किसी भी अच्छे अस्पताल में लामा को ठीक नहीं माना जाता। सरकारी अस्पताल में इसे और गंभीर माना जाता है क्योंकि यहां इलाज नि:शुल्क मिलता है। दिन में ही व्यवस्था कमजोर, तो शाम को किसके भरोसे
एमवाय के कुछ डॉक्टरों का कहना है कि यहां दिन में ही सही इलाज नहीं मिल पाने के कई केस आते हैं, जबकि उस समय सभी वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहते हैं। ऐसे में शाम को भारी फीस लेकर मरीजों को बेहतर इलाज देने की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। मेडिक्लेम व आयुष्मान वाले मरीज भी जाते हैं कई बार मेडिकोलीगल व दुर्घटना के मरीज आते हैं। बाद में आयुष्मान या मेडिक्लेम वाले बाहर चले जाते हैं। डॉ. अशोक यादव, अधीक्षक लामा रोकने कमेटी बनाई है, मामले घट रहे हैं लामा रोकने के लिए कमेटी बनाई है। मामलों में लगातार कमी आ रही है। कई बार बेड भी नहीं मिल पाते। डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन एमजीएम



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