गुड्डा-गुड़िया के कपड़े सिलने वाली लड़की बनी आईटीआई की टीचर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी!

गुड्डा-गुड़िया के कपड़े सिलने वाली लड़की बनी आईटीआई की टीचर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी!


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Satna News: मध्य प्रदेश के सतना की सादा हसन की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं. एक इलेक्ट्रीशियन की बेटी ने बचपन में गुड्डा-गुड़िया के कपड़े सिलने से शुरुआत की और धीरे-धीरे उसी हुनर को अपना करियर बना लिया. मेहनत, लगन और परिवार के सहयोग से उन्होंने सिलाई और फैशन डिजाइनिंग में महारत हासिल की. दिलचस्प बात यह है कि जिस सरकारी आईटीआई सतना में वे कभी छात्रा थीं, आज वहीं गेस्ट फैकल्टी बनकर छात्रों को पढ़ा रही हैं. यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो साधारण शुरुआत भी बड़ी सफलता तक पहुंचा सकती है.

शिवांक द्विवेदी, सतना: मध्य प्रदेश के सतना की 42 वर्षीय सादा हसन की कहानी यह साबित करती है कि अगर किसी के भीतर हुनर और उसे आगे बढ़ाने का जज़्बा हो तो साधारण परिस्थितियां भी बड़े सपनों के रास्ते नहीं रोक पातीं. इलेक्ट्रीशियन पिता की इस बेटी का बचपन, गुड्डा-गुड़िया के कपड़े सिलने से शुरू हुआ और यही शौक आज उनके करियर का आधार बन चुका है. खास बात यह है कि जिस सरकारी आईटीआई सतना में कभी वे छात्रा बनकर बैठती थीं आज वहीं गेस्ट फैकल्टी बनकर छात्रों को सिलाई और फैशन डिजाइनिंग की बारीकियां सिखा रही हैं.

बचपन से ही सिलाई और डिजाइनिंग में थी रुचि
लोकल 18 से बातचीत में सादा हसन ने बताया कि उन्हें बचपन से ही सिलाई और कपड़ों के डिजाइन बनाने का शौक था. महज 8-9 साल की उम्र में ही उन्होंने यह समझ लिया था कि वे कपड़ों के अलग अलग डिजाइन तैयार कर सकती हैं. उस समय वे गुड्डा गुड़िया के लिए छोटे मोटे कपड़े और फ्रॉक बनाया करती थीं और धीरे धीरे यह शौक एक हुनर में बदलता चला गया साथ ही परिवार का भी उन्हें हमेशा पूरा सहयोग मिला. उनकी मां ने उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आजादी दी जिससे उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया.

गुरु प्रभा सोनी से सीखी सिलाई की बारीकियां
सादा हसन बताती हैं कि उनके हुनर को सही दिशा देने में उनकी गुरु मऊगंज निवासी प्रभा सोनी की बड़ी भूमिका रही. उन्हीं के पास रहकर सादा ने सिलाई की बारीकियां सीखीं. शुरुआत में प्रभा सोनी उनसे फीस लेती थीं लेकिन सादा की लगन और मेहनत देखकर उन्होंने बाद में उन्हें मुफ्त में सिखाना शुरू कर दिया और कई बार जरूरत पड़ने पर वे खुद सादा को पैसे दिया करती थीं.

गांव-गांव जाकर महिलाओं को सिखाई सिलाई
गुरु के कहने पर ही सिर्फ 19 साल की उम्र में सादा हसन नेहरू युवा केंद्र नामक सामाजिक संस्था के साथ जुड़ गईं और इस एनजीओ में करीब सात साल तक काम किया. इस दौरान उन्होंने गांव गांव जाकर महिलाओं और युवतियों को मुफ्त में सिलाई सिखाई. उनका उद्देश्य था कि महिलाएं भी अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बन सकें. इस काम से उन्हें समाज में पहचान भी मिली और कई महिलाओं को रोजगार का रास्ता भी मिला.

आईटीआई की पढ़ाई के बाद मिली उसी संस्थान में नौकरी
सादा बताती हैं कि एक समय उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया था लेकिन आईटीआई की डिग्री न होने के कारण उनका चयन नहीं हो पाया. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वे आईटीआई की पढ़ाई जरूर करेंगी. उन्होंने सरकारी आईटीआई सतना में प्रवेश लिया और सिलाई-फैशन डिजाइनिंग का कोर्स पूरा किया. कोर्स खत्म होने के लगभग एक साल बाद गेस्ट फैकल्टी की भर्ती निकली. अपने शिक्षकों की सलाह पर उन्होंने आवेदन किया और चयनित हो गईं. पिछले तीन वर्षों से वे उसी संस्थान में प्रति माह 20 हजार की सैलरी पर गेस्ट फैकल्टी के रूप में पढ़ा रही हैं.

युवतियों को दिया आत्मनिर्भर बनने का संदेश
सादा हसन कहती हैं कि जब वे इसी क्लास में छात्रा के रूप में बैठती थीं तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन यहीं खड़े होकर वे दूसरों को पढ़ाएंगी. आज यह उनके लिए गर्व का क्षण है. वे युवतियों को संदेश देती हैं कि लड़कियों को घर में बैठकर समय नहीं गंवाना चाहिए. चाहे वे शादीशुदा हों या अविवाहित उन्हें अपने हुनर को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि आत्मनिर्भर बनना ही जीवन में आत्मविश्वास और सम्मान दिलाता है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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