नहीं मिला सिलेंडर, कोई बात नहीं! इस होटल ने आपदा में अपनाया ये तरीका, बन रहा लाजवाब खाना

नहीं मिला सिलेंडर, कोई बात नहीं! इस होटल ने आपदा में अपनाया ये तरीका, बन रहा लाजवाब खाना


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कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कमी से खंडवा के होटल ने पुराने पारंपरिक तरीके से समाधान निकालकर अपने स्टाफ का रोजगार भी बचाया और ग्राहकों को स्वादिष्ट खाना भी परोसना जारी रखा है. इस होटल ने लकड़ी और कोयले की आंच पर खाना बना शुरू कर दिया है.

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के कई शहरों में दिखाई देने लगा है. इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसका असर अब मध्य प्रदेश के खंडवा में भी देखने को मिल रहा है, जहां कमर्शियल LPG सिलेंडर की किल्लत होने लगी है. कई जगह सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं और होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ा असर
खंडवा में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं. कुछ जगहों पर काम पूरी तरह बंद भी हो गया है. ऐसे में होटल मालिकों के सामने अपने स्टाफ का रोजगार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

नुक्कड़ होटल ने निकाला अनोखा जुगाड़
खंडवा के प्रसिद्ध नुक्कड़ होटल ने इस समस्या से निपटने के लिए अलग रास्ता अपनाया है. होटल में गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण किचन से गैस चूल्हे हटा दिए गए हैं और अब यहां लकड़ी के चूल्हे और कोयले की सिगड़ी पर खाना बनाया जा रहा है.

होटल मालिक रितेश कपूर ने बताई वजह
होटल के मालिक रितेश कपूर बताते हैं कि आपदा में ही अवसर ढूंढे जाते हैं. होटल में कई लोग काम करते हैं और अगर गैस की कमी के कारण होटल बंद हो जाता तो स्टाफ बेरोजगार हो जाता. इसलिए उन्होंने पुराने समय की तरह लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने का फैसला लिया. उनका कहना है कि पहले हमारे बुजुर्ग भी इसी तरीके से खाना बनाते थे. अब वही तरीका अपनाया जा रहा है. इससे गैस पर होने वाला खर्च भी कम होगा और स्टाफ का रोजगार भी बना रहेगा.

स्वाद भी हो रहा बेहतर
होटल के शेफ का कहना है कि लकड़ी और कोयले की आंच पर बना खाना अलग स्वाद देता है. गांवों में पहले इसी तरह चूल्हों पर खाना बनता था. अब उसी परंपरागत तरीके से यहां खाना बनाया जा रहा है.

पुराने जमाने का तरीका फिर लौटा
नुक्कड़ होटल खंडवा के सबसे प्रसिद्ध होटलों में से एक माना जाता है, जिसे दो भाई मिलकर चलाते हैं. गैस की कमी के कारण उन्होंने पुराने जमाने की सिगड़ी और लकड़ी के चूल्हे का सहारा लिया है. यहां अब कोयले की सिगड़ी के नीचे पंखा लगाकर आग तेज की जाती है और उसी पर खाना पकाया जाता है, जबकि लकड़ी के चूल्हे पर ग्रेवी और अन्य व्यंजन तैयार किए जाते हैं.

इस तरह संकट के समय खंडवा के इस होटल ने पुराने पारंपरिक तरीके से नया समाधान निकालकर अपने स्टाफ का रोजगार भी बचाया और ग्राहकों को स्वादिष्ट खाना भी परोसना जारी रखा है.



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