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Chaitra Navratri: नवरात्रि के पावन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की श्रद्धा से पूजा की जाती है. चौथे दिन मां कुष्मांडा की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है. इस दिन उन्हें खास भोग अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करने से सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं पूजा की सही विधि और भोग.
Chaitra Navratri: हिन्दू धर्म में हर तिथि हर वार का अपना धार्मिक महत्व है. उसी के साथ चैत्र माह को विशेष महत्व दिया जाता है. क्योंकि इस माह चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व भी शुरू होता है और सनातन परंपरा में इन नौ दिनों का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि इन दिनों माता स्वयं धरती पर आकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है. इस दिन देवी को मालपुआ या मीठे पकवान का भोग लगाकर विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
जानिए कौन है मां कूष्मांडा
माता के अलग अलग रूप का अलग-अलग अर्थ शास्त्रों मे बताया गया है. वैसे ही कूष्मांडा के अर्थ की बात करें तो इसका अर्थ कुम्हड़े से भी है. मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा बहुत प्रिय है, इसलिए इन्हें कूष्मांडा कहा जाता है. कुम्हड़े में कई बीज होते हैं, हर बीज में एक पौधे को जन्म देने की क्षमता होती है. इसी तरह मां कूष्मांडा के अंदर भी सृजन की शक्ति है. उन्होंने इस पूरे ब्रह्मांड की रचना की है.
जानिए मां कूष्मांडा का कैसा है स्वरूप
नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाने वाली मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदि शक्ति माना जाता है. मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब माता ने अपनी हल्की मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी. इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और सृजन की देवी कहा जाता है. इस दिन हरे रंग का विशेष महत्व माना गया है, जो समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक है. मां कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली हैं. उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित रहते हैं, जबकि आठवें हाथ में जपमाला है. माता सिंह की सवारी करती हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि व स्वास्थ्य का आशीर्वाद देती हैं.
जानिए मां कूष्मांडा का प्रिय भोग
नवरात्रि के दौरान मां कूष्मांडा की पूजा में विशेष भोग का महत्व माना गया है. पूजा के समय पीले रंग का केसरयुक्त पेठा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है और इसी पेठे का भोग माता को लगाया जाता है. कई स्थानों पर श्रद्धालु सफेद पेठे के फल की प्रतीकात्मक बलि भी चढ़ाते हैं. मान्यता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. इसके साथ ही मालपुआ और बताशे का भोग लगाने से मां कूष्मांडा की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें