सागर जिले में सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों को आश्रय देने के लिए 442 एकड़ में प्रदेश की सबसे बड़ी मॉडर्न गौशाला बनाई जा रही है. मध्य प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड के द्वारा इस जमीन पर गौशाला बनाने के लिए निविदा निकाली थी उसमें दिल्ली की कंपनियों ने रुचि दिखाई है. यहां तक कि वह फील्ड पर आकर यहां का मौका मुआयना भी कर चुके हैं और जल्द ही अब काम शुरू होगा.
मॉर्डन गौशाला में रखे जाएंगे आवारा पशु
मॉडर्न गौशाला में जो निराश्रित सड़कों पर घूमने वाले, गांव में, गलियों में घूमने वाले आवारा मवेशी हैं. उनको पड़कर यहां पर रखा जाएगा. इनके लिए भूसा और चारे की व्यवस्था होगी, लेकिन सरकार का उद्देश्य है कि जब हम इस तरह का कोई प्रोजेक्ट तैयार करें, तो उसमें केवल लागत ना हो, बल्कि उससे हमें कुछ इनकम भी प्राप्त हो. ताकि इसको निरंतर रूप से संचालित किया जा सके. इसके लिए सरकार ने एक प्रॉपर प्लान तैयार किया है, जिसमें गौशाला से कुछ अर्निंग भी करेंगे.
कमाई का जरिया भी होगी मॉर्डन गौशाला
मॉडर्न गौशाला में सबसे पहले 25% उन्नत नस्ल की दुधारू पशु रखे जाएंगे. ताकि यहां पर दूध का प्रोडक्शन हो और इस प्रोडक्शन से पैसों की आवक हो. इसके अलावा जो मवेशियों का गोबर होगा, उससे गोबर गैस प्लांट से बायोगैस बनाई जाएगी और इसको बेचा जाएगा. गोबर गैस से जो गोबर का अर्क निकलेगा उसका भी खाद्य बनाकर किसानों को बेचा जाएगा. इसके अलावा यहां पर चारा उत्पादन पंचगव्य की भी यूनिट लगेगी. इस तरह अलग-अलग रूप में गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक साथ काम होगा.
कनेक्टिविटी की पूरी सुविधा
सागर जिले की बीना तहसील में आने वाले देवल गांव में अंग्रेजों के समय से गौशाला रही है. लेकिन 1993 में इसे बंद कर दिया गया था. ब्रिटिश काल से ही यहां लगभग 3600 हेक्टेयर जमीन थी, लेकिन जब 90 के दशक में गौशाला बंद की गई, तो वन विभाग ने अपनी जमीन वापस ले ली थी. अब इसी गांव में राजस्व विभाग की 442 एकड़ की जमीन पर फिर से गौशाला बनाई जा रही है. यहां से रेलवे स्टेशन की दूरी मात्र 7 किलोमीटर है. जिसकी वजह से यहां झांसी, दिल्ली, भोपाल के लिए अच्छी कनेक्टिविटी मिलेगी.
सागर में पशु विभाग कार्यालय में उपसंचालक कार्य योजना प्रभारी बीएस ठाकुर मध्य प्रदेश सरकार ने स्वावलंबी गौशाला कामधेनु निवास 2025 नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य केवल गौ रक्षा की प्रति संवेदना नहीं. बल्कि सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार बने. उन्नत तकनीक से बनाई जाने वाली गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने में यहां पर पंचगव्य, सीएनजी या सीबीजेड, दुग्ध उत्पादन, जैविक खाद जैसी चीजों को बनाकर भेजा जाएगा. इससे जो इनकम होगी उससे गौशाला स्वावलंबी बनेगी. इतना ही नहीं जब यहां पर गौशाला तैयार होगी, तो पहले चरण में ही कम से कम 200 लोगों के लिए रोजगार भी मिलेगा.
कार्य योजना प्रभारी बीएस ठाकुर ने कही ये बात
बी एस ठाकुर ने बताया कि शासन की जो नीति है उसके अनुसार पहले चरण में 130 एकड़ जमीन दी जा रही है, जिसमें 5000 निराश्रित मवेशियों को रखने की क्षमता रहेगी. इसके बाद इसको धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा. 442 एकड़ जमीन में लगभग 15000 मवेशियों को रखा जाएगा. इस तरह से सड़कों पर जो मवेशी घूम रहे हैं. वह गौशाला में पहुंच जाएंगे.