गैस सिलेंडर की कमी से अब नहीं रुकेगी शहनाई, 400 साल पुरानी परंपरा से पकता पौष्टिक खाना

गैस सिलेंडर की कमी से अब नहीं रुकेगी शहनाई, 400 साल पुरानी परंपरा से पकता पौष्टिक खाना


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How to Cook without Gas in Wedding: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में मुस्लिम समाज की एक अनोखी परंपरा आज भी कायम है जहां शादियों में गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं किया जाता. यहां शादी के सभी व्यंजन लकड़ी के चूल्हे पर ही तैयार किए जाते हैं. इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा करीब 400 से 500 साल पुरानी है और आज भी लोग इसे पूरी तरह निभा रहे हैं. लकड़ी की आंच पर पकने वाला खाना स्वादिष्ट और पौष्टिक माना जाता है. जानिए बुरहानपुर की इस अनोखी शादी की परंपरा की पूरी कहानी.

Gas Cylinder Substitute for Cooking: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक ऐसी अनोखी परंपरा आज भी जिंदा है, जो आधुनिक दौर में भी नहीं बदली. यहां मुस्लिम समाज के कई परिवारों में शादियों के दौरान गैस सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

समाज के लोगों के मुताबिक शादी में बनने वाले सभी व्यंजन आज भी लकड़ी के चूल्हे पर ही तैयार किए जाते हैं. यह परंपरा नई नहीं बल्कि करीब 300 से 400 साल पुरानी बताई जाती है. समाज के शेख रझा बताते हैं कि उनके यहां पीढ़ियों से यही परंपरा चली आ रही है और आज भी लोग इसे पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ निभा रहे हैं.

लकड़ी के चूल्हे पर बनता है शादी का पूरा खाना
शेख रझा के अनुसार समाज में चाहे कोई अमीर हो या गरीब, शादी के मौके पर गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं किया जाता. शादी वाले घर के बाहर बड़े-बड़े मिट्टी या ईंट के चूल्हे बनाए जाते हैं और उसी पर पूरे शादी के व्यंजन पकाए जाते हैं. लकड़ी की आंच पर बनने वाला खाना न सिर्फ परंपरा का हिस्सा है बल्कि लोगों का मानना है कि इससे खाने का स्वाद भी काफी बढ़ जाता है.

400–500 साल पुरानी है यह परंपरा
इस परंपरा को लेकर इतिहासकार नौशाद सर बताते हैं कि बुरहानपुर में मुस्लिम समाज के बीच यह परंपरा करीब 400 से 500 साल पुरानी है. उनके मुताबिक पहले के समय में गैस या आधुनिक साधन नहीं थे, इसलिए लोग लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बनाते थे. धीरे-धीरे यह तरीका परंपरा बन गया और आज भी कई परिवार इसे निभा रहे हैं.

लकड़ी के चूल्हे के खाने का अलग स्वाद
इतिहासकारों और समाज के लोगों का कहना है कि लकड़ी की धीमी आंच पर पकने वाला खाना ज्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है. उनका मानना है कि लकड़ी के चूल्हे पर बने भोजन में पोषक तत्व भी ज्यादा सुरक्षित रहते हैं. यही वजह है कि शादी में बने व्यंजनों का स्वाद लोगों को अलग ही लगता है.

दाल-चावल और बूंदी होती है खास
बुरहानपुर के मुस्लिम समाज की शादियों में पारंपरिक भोजन भी खास होता है. यहां सबसे ज्यादा दाल और चावल बनाए जाते हैं. वहीं मिठाई में बूंदी का खास महत्व होता है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं. शादी में आने वाले मेहमान भी लकड़ी के चूल्हे पर बने इन व्यंजनों का स्वाद लेकर खुश हो जाते हैं.

गैस संकट का भी नहीं पड़ता असर
समाज के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि आजकल गैस सिलेंडर की कमी या महंगाई की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इस समाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ता. क्योंकि यहां शादी के समय पहले से ही लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने की परंपरा निभाई जाती है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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