ऐसा कई साल बाद पहली बार देखने को मिल रहा है जब मार्च में पंजीयन दफ्तर से रजिस्ट्री कराने वाले पक्षकारों की भीड़ गायब हैं। रेट 1 अप्रैल से बढ़ेंगे, इस खबर के बाद भी यहां गिने चुने लोग ही पहुंच रहे हैं। स्लॉट भी आसानी से उपलब्ध हैं, वेटिंग जैसी स्थिति अभी तक नहीं बनी है। चूंकि इस बार इनकम टारगेट से काफी कम है, इसलिए शनिवार-रविवार को भी दफ्तर खुलेगा।
शुक्रवार सुबह 11 बजे 11.30 बजे रजिस्ट्री कराने का स्लॉट उपलब्ध था और ऐसे ही शाम 5 बजे। सर्विस प्रोवाइडर मनीष मंगल ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस बार काम नहीं है। गत वर्ष मार्च के दूसरे सप्ताह में वे 10 रजिस्ट्री रोज करवा रहे थे, इस बार संख्या 2 से ऊपर नहीं जा रही है। ऐसे ही एक अन्य सर्विस प्रोवाइडर कमल मित्तल ने कहा। उन्होंने रेट अधिक होने से भी काम पर असर बताया, कहा कि पक्षकार को पूरा पैसा एक नंबर में बताना होता है। कुछ लोग दूसरी जगह भी निवेश करने लगे हैं। मित्तल ने कहा कि पट्टे के दस्तावेज अब भोपाल से पंजीयन होते हैं, इसमें दिक्कत है। इसलिए भी काम कम हो रहा है। पंजीयन दफ्तर में सन्नाटा, दोपहर 1:52 बजे
स्लॉट 240, रजिस्ट्री हुईं 187: शहरी क्षेत्र में वर्तमान में रोज के लिए 240 स्लॉट हैं, मतलब एक उप पंजीयक की लिमिट 30 की। शुक्रवार को दोनों वृत में 187 रजिस्ट्री हुईं। इसकी पुष्टि वरिष्ठ उप पंजीयक केएन वर्मा ने की और कहा यदि काम और भीड़ बढ़ेगी तो स्लॉट संख्या तत्काल बढ़ जाएगी। तीन साल से नहीं आया बड़ा प्रोजेक्ट, इसलिए निवेश कम
क्रेडाई की ग्वालियर इकाई के उपाध्यक्ष महेश भारद्वाज ने कहा कि प्रॉपर्टी कारोबार अभी मंदी में है। इसके युद्ध सहित कई कारण हैं। मप्र में सबसे अधिक रजिस्ट्रेशन फीस लगती है, इसे कम किया जाना चाहिए। ग्वालियर में तीन साल से कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आया है। एफएआर को लेकर भी विसंगति चली आ रही हैं। इस कारण ग्वालियर में खासतौर पर प्रॉपट्री के मार्केट में निवेश में कमी देखी जा रही है। 19 सुझाव-आपत्तियां पहुंचीं, 15 तक मौका
नई कलेक्टर गाइड लाइन के प्रस्ताव पर कुल 19 सुझाव-आपत्ति पहुंचे हैं। इनमें कुछ फरवरी के भी है। अब आपत्तियां लगाने के लिए सिर्फ दो दिन बचे हैं, 15 मार्च के बाद कोई भी आपत्ति स्वीकार नहीं होगी। जो 19 आवेदन पहुंचे हैं, उनको लेकर 18 मार्च को कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसके बाद सारे प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन समिति के पास भेजे जाएंगे। जिसके बाद 1 अप्रैल से नई गाइडलाइन लागू हो जाएगी।
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