पहले महिलाएं सिखाएंगी खेती, फिर उपज खरीदेंगी, औषधीय फसलों से बदलेगी किसानों की किस्मत!

पहले महिलाएं सिखाएंगी खेती, फिर उपज खरीदेंगी, औषधीय फसलों से बदलेगी किसानों की किस्मत!


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महिलाएं सिखाएंगी खेती, फिर फसल खरीदेंगी, इस Idea से बदलेगी किसानों की किस्मत!

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Khandwa News: महिलाओं ने जंगल और खेतों में उगने वाली कई ऐसी वनस्पतियों को भी उपयोग में लाना शुरू किया है, जिन्हें पहले लोग बेकार समझते थे. अब उन्हीं वनस्पतियों से औषधीय और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. स्व-सहायता समूह के माध्यम से यह पहल सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ रही है.

Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब किसानों को औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं. खास बात ये कि महिलाएं किसानों को सिर्फ खेती सिखाएंगी ही नहीं, बल्कि उनकी तैयार फसल को खरीदने की गारंटी भी लेंगी. इससे किसानों को बाजार की चिंता नहीं रहेगी और उन्हें अच्छी आमदनी का मौका मिलेगा.

पंधाना के जलकुंआ गांव की पहल
पंधाना ब्लॉक के ग्राम जलकुंआ में महिलाओं द्वारा संचालित नमामि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी इस दिशा में नया कदम उठा रही है. यह कंपनी चुकंदर, मोरिंगा, हल्दी और नीली चाय जैसी औषधीय फसलों का उत्पादन करती है. इन फसलों से फूड प्रोडक्ट, दवाइयां और फूड कलर जैसे कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इन उत्पादों की वजह से समूह की महिलाओं ने न सिर्फ जिले बल्कि देश-विदेश में भी अपनी पहचान बनाई है.

किसानों को देंगी प्रशिक्षण
कंपनी की संचालक सुनीता पवार बताती हैं कि जो किसान औषधीय फसलों की खेती करना चाहते हैं, उन्हें कंपनी की महिलाएं प्रशिक्षण देंगी. किसानों को फसल की बुवाई से लेकर उत्पादन तक हर चरण में मार्गदर्शन दिया जाएगा. जब फसल तैयार हो जाएगी तो कंपनी किसानों की उपज को बाजार में बेचने की जिम्मेदारी भी लेगी.

नवाचार शुरू
कंपनी की सदस्य कला बामने, पुष्पा कोगे, कल्पना कोचले और पूजा पटेल बताती हैं कि अब “फार्मर प्रोड्यूसर टू फार्मर प्रोड्यूसर” नाम से एक नया नवाचार शुरू किया जा रहा है. इसके तहत प्रदेशभर की अन्य फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के साथ मिलकर औषधीय फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर काम किया जाएगा. फिलहाल, हरदा जिले की एक औषधीय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के साथ टाइअप भी किया जा चुका है.

जंगली वनस्पतियों को बनाया उपयोगी
इन महिलाओं ने जंगल और खेतों में उगने वाली कई ऐसी वनस्पतियों को भी उपयोग में लाना शुरू किया है जिन्हें पहले लोग बेकार समझते थे. अब उन्हीं वनस्पतियों से औषधीय और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. स्व-सहायता समूह के माध्यम से यह पहल सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ रही है. साथ ही अब किसान भी औषधीय खेती से अच्छी कमाई कर सकेंगे.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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