भिंड के कुटुंब न्यायालय में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में वर्षों से अलग रह रहे कई पति-पत्नी आपसी समझौते के बाद फिर से एक हो गए हैं। न्यायालय की पहल और काउंसलिंग के बाद विवाद सुलझने पर दंपतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया है। समझौते के बाद न्यायालय परिसर में कई दंपतियों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए। कुछ दंपतियों ने खुले तौर पर अपनी भावनाएं भी जाहिर कीं। एक पत्नी ने कहा, “अगर अब ठीक से व्यवहार करेंगे तो हम साथ रहने को तैयार हैं।” वहीं पति ने भी अपनी गलतियों को सुधारने और परिवार को फिर से जोड़ने का भरोसा दिलाया। दोनों ने पुराने विवादों को पीछे छोड़ने का संकल्प लिया। जज ने पौधा भेंट कर दी रिश्ते निभाने की सीख समझौते के बाद प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय भिंड दिलीप गुप्ता ने दंपतियों को एक-एक पौधा भेंट किया। उन्होंने कहा कि यह पौधा उनके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। न्यायाधीश ने समझाइश देते हुए कहा कि जैसे पौधे को नियमित पानी और देखभाल की जरूरत होती है, वैसे ही दांपत्य जीवन को भी प्यार, धैर्य और समझ की जरूरत होती है। आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की दी सलाह न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने कहा कि यदि किसी बात पर मतभेद हो तो उसे अदालत तक लाने के बजाय आपस में बैठकर सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। लोक अदालत में ऐसे कई मामले आए जो लंबे समय से न्यायालय में लंबित थे। इन मामलों के कारण दोनों पक्ष मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी झेल रहे थे। बिना हार-जीत के आपसी सहमति से सुलझे मामले लोक अदालत के माध्यम से बिना किसी हार-जीत के आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराया गया। कार्यवाही पूरी होने के बाद दंपति मुस्कुराते हुए घर के लिए रवाना हुए। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ मौजूद थे। इस आयोजन में न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और पैरालीगल वॉलंटियर्स ने काउंसलिंग कर समझौते की राह तैयार की।
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