भिंड में नेशनल हाईवे-719 पर कल (सोमवार) के लिए प्रस्तावित संत समाज के आंदोलन को लेकर रविवार को दिनभर ग्वालियर जिला प्रशासन और संतों के बीच मनाने-मनौव्वल का दौर चलता रहा। प्रशासन की ओर से आंदोलन की अनुमति नहीं दी गई है, लेकिन संत समाज अपने निर्णय पर अडिग दिखाई दे रहा है। आंदोलन का केंद्र ग्वालियर जिले के बरैठा टोल प्लाजा को बनाया गया है, जहां सोमवार को बड़ी संख्या में संतों और समर्थकों के जुटने की संभावना है। रविवार को ग्वालियर प्रशासन के अधिकारियों ने संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज से चर्चा कर आंदोलन टालने का प्रयास किया, लेकिन कालीदास महाराज ने स्पष्ट कर दिया कि यदि प्रशासन को कोई पक्ष रखना है तो वह आंदोलन स्थल पर ही रखे, वहीं बातचीत की जाएगी। संत समाज का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से किया जाएगा और अपनी मांगों को लेकर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। दूसरी ओर संभावित आंदोलन को देखते हुए ग्वालियर और भिंड दोनों जिलों के प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। दोनों जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सोमवार को बरैठा टोल प्लाजा क्षेत्र में तैनात रहेंगे। रविवार शाम से ही प्रशासन की ओर से टोल प्लाजा के आसपास बैरीकेडिंग शुरू कर दी गई। बड़ी संख्या में बैरीकेड और पुलिस बल मौके पर पहुंचाया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। आंदोलन स्थल पर पांडाल लगाया गया
उधर संत समाज और आंदोलनकारियों ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आंदोलन स्थल पर पांडाल लगाया गया है और विभिन्न टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। खान-पान, बैनर-झंडे की व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत तक के लिए अलग-अलग दल बनाए गए हैं। साथ ही यह भी तय किया गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले लोग किन वाहनों से पहुंचेंगे और वाहनों की पार्किंग कहां कराई जाएगी। आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पूर्व सैनिक संगठनों के पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। समाजसेवी और संत समाज के प्रतिनिधि आंदोलन की रूपरेखा तय कर चुके हैं। अब सबकी नजर सोमवार को होने वाले इस आंदोलन और प्रशासन की रणनीति पर टिकी हुई हैं।
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