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Cooler Made from Jugaad: बुंदेलखंड में बढ़ती गर्मी के बीच सागर जिले के एक आठवीं के छात्र ने अनोखा जुगाड़ कूलर तैयार किया है जो बिना बिजली के ठंडी हवा देता है. इस मॉडल को कबाड़ के सामान से तैयार किया गया है और इसमें बिजली की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती. छात्र ने करीब दो महीने की मेहनत और अपने शिक्षक के मार्गदर्शन में इस अनोखे सिस्टम को बनाया है. यह कूलर छत की हवा को पाइप के जरिए कमरे तक पहुंचाकर उसे ठंडा करता है. खास बात यह है कि यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है और इसमें बिजली का खर्च भी नहीं आता.
Tips to Make Cooler from Scratch: सागर सहित पूरे बुंदेलखंड इलाके में गर्मी ने अभी से अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. मार्च के महीने में ही मई जैसी गर्मी महसूस होने लगी है. ऐसे में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए कूलर, पंखा और एसी का सहारा लेने लगे हैं. लेकिन इसके साथ बिजली का बिल भी बढ़ने लगता है, जो आम लोगों की जेब पर भारी पड़ता है. इसी समस्या का हल सागर के एक छात्र ने अपने अनोखे जुगाड़ से निकालने की कोशिश की है.
8वीं के छात्र ने बनाया खास मॉडल
दमोह जिले के हटा ब्लॉक के रसीलपुर की माध्यमिक शाला में पढ़ने वाले आठवीं के छात्र विकास अहिरवार ने करीब दो महीने की मेहनत से एक खास मॉडल तैयार किया है. इस मॉडल को बनाने में उनके शिक्षक साधुराम कुर्मी ने भी मार्गदर्शन दिया. खास बात यह है कि यह सिस्टम पूरी तरह कबाड़ के सामान से तैयार किया गया है और इसमें बहुत कम खर्च आता है.
इस तरह काम करता है यह सिस्टम
इस मॉडल के मुख्य रूप से तीन हिस्से होते हैं. पहला हिस्सा छत पर लगाया जाता है जिसमें एक हूपर लगाया जाता है. यह हूपर छत पर चलने वाली हवा को इकट्ठा करता है. इसके साथ एक ब्लेड भी लगी होती है जो हवा की दिशा के अनुसार हूपर को घुमाती रहती है. इसके बाद एक पाइप के जरिए यह हवा कमरे में रखे जालीदार बॉक्स तक पहुंचती है. पाइप पर स्पॉन्ज लपेटी जाती है और उस पर धीरे-धीरे पानी बहाया जाता है. इससे हवा ठंडी हो जाती है. कमरे में रखे बॉक्स में नीचे पानी भरा रहता है जिससे हवा के धूल और अशुद्धियां भी पानी में रुक जाती हैं. इस तरह कमरे में ठंडी और साफ हवा लगातार आती रहती है.
कबाड़ से तैयार हुआ देसी कूलर
इस जुगाड़ वाले कूलर को बनाने में टूटे पाइप, सॉकेट, चद्दर की पत्ती, पुरानी चुंगी, हूपर, प्लाई बोर्ड, प्लास्टिक का डिब्बा, छोटी कीलें और पुरानी स्पॉन्ज जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है. यानी घर में पड़े कबाड़ के सामान से भी इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है.
इस सिस्टम के बड़े फायदे
इस मॉडल के कई फायदे बताए जा रहे हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की बिजली की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह पूरी तरह फ्री में चलता है. दूसरा फायदा यह है कि इसमें किसी तरह की रासायनिक प्रक्रिया नहीं होती, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता. साथ ही यह पूरी तरह सुरक्षित भी है और दुर्घटना की संभावना भी नहीं रहती. छोटे से छात्र का यह अनोखा जुगाड़ अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और गर्मी से राहत पाने का एक सस्ता और आसान तरीका भी साबित हो सकता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें