जंगलों को आग से बचाने बैतूल में नुक्कड़ नाटक अभियान: आदिवासी बोली में कलाकारों ने समझाया नुकसान, महुआ-तेंदूपत्ता सीजन में बढ़ते खतरे पर जागरूकता – Betul News

जंगलों को आग से बचाने बैतूल में नुक्कड़ नाटक अभियान:  आदिवासी बोली में कलाकारों ने समझाया नुकसान, महुआ-तेंदूपत्ता सीजन में बढ़ते खतरे पर जागरूकता – Betul News




बैतूल में वन विभाग ने गर्मी के मौसम में जंगलों को आग से बचाने के लिए एक अनूठा जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। आदिवासी अंचलों में स्थानीय बोली में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ग्रामीणों को वनाग्नि से होने वाले नुकसान और उससे बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं। यह पहल वन संरक्षक बैतूल मधु व्ही. राज, दक्षिण वनमंडल के डीएफओ अरिहंत कोचर, एसडीओ पांडे और आमला रेंज के रेंजर नानकराम कुशवाह के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। अभियान के तहत आमला रेंज के वनग्राम लादी में नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर ग्रामीणों को जंगलों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। एकलव्य लोक कला समिति बैतूल के लोक कलाकार बसंत कवड़े और उनकी टीम स्थानीय आदिवासी बोली में नाटक प्रस्तुत कर रही है। इन नाटकों के जरिए सैकड़ों ग्रामीणों को जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा का संदेश दिया जा रहा है। कलाकारों ने बताया कि महुआ बीनने और तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान अनजाने में लगाई गई आग पूरे जंगल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे वन संपदा और वन्य जीवों का जीवन खतरे में पड़ जाता है। गर्मी में बढ़ जाती हैं आग लगने की घटनाएं
वन विभाग के अनुसार, हर साल गर्मी में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इन्हें रोकने के लिए विभाग सैटेलाइट डेटा से निगरानी, फायर लाइन निर्माण, वनकर्मियों की गश्त और जनजागरूकता अभियान जैसे कई उपाय करता है। इस बार दक्षिण वनमंडल ने ग्रामीण अंचलों में स्थानीय कलाकारों की मदद से नुक्कड़ नाटक आयोजित कर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया है, ताकि ग्रामीण संदेश को अपनी ही बोली में आसानी से समझ सकें। नाटकों के दौरान ग्रामीणों को जंगलों की सुरक्षा का संकल्प भी दिलाया जा रहा है और आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क रहने की अपील की जा रही है। वन अधिकारियों का कहना है कि फायर सीजन में महुआ और तेंदूपत्ता संग्रहण के समय आग लगने का खतरा सबसे अधिक होता है। ऐसे में ग्रामीणों की जागरूकता से आगजनी की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। कार्यक्रम में परिक्षेत्र अधिकारी आमला नानकराम कुशवाह, परिक्षेत्र सहायक लादी राजेंद्र मोखलगाय, परिक्षेत्र सहायक आमला योगेश साहू, बीट गार्ड मंगारा विशाल वामने, बीट गार्ड लादी भीमराव सातनकर, बीट गार्ड बीजादेही यशवंत सिंह चौहान, बीट गार्ड खतेड़ा देवेंद्र सिंह ठाकुर, बीट गार्ड कलमेश्वरा अरुण प्रताप कौरव, बीट गार्ड पचामा बिजेंद्र कैथवास तथा सरपंच राजू शिलुकर सहित ग्रामीण रूठूं, बबलू और बड़ी संख्या में गांव के लोगों की अहम भूमिका है।



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