Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले पर कुछ महीने पहले लाल आतंक का दाग था. लेकिन, 12 दिसंबर को दीपक और रोहित के सरेंडर के साथ ही ये दाग भी धुल गया. दशकों तक चले इस खूनी खेल ने न जाने कितने परिवार उजाड़े और न जाने कितनों की जिंदगी बर्बाद की. दूसरी तरफ देश की अखंडता और एकता के लिए नक्सलियों से लोहा लेने वाले जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए.
लेकिन, जब हथियार से बात करने वाले नक्सलियों ने मुख्य धारा में लौटना चाहा तो सुरक्षाबलों ने सब कुछ भुला कर उनके लिए रेड कारपेट बिछा दी. इतना ही नहीं, उनके दस्तावेज बनाने के लिए पुलिस प्रशासन उनके राज्य और उनके गांवों के चक्कर लगा रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ उनकी आगे की जिंदगी बेहतर हो जाए, इसलिए पुलिस प्रशासन बीते डेढ़ महीने से सरेंडर हुए नक्सलियों का कौशल विकास करवा रही है.
सरेंडर नक्सली सीख रहे स्किल
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने लोकल 18 को बताया, सरेंडर महिला नक्सलियों से एक अभिरुचि फॉर्म भरवाया गया, जिसके बाद उनके सकारात्मक जवाब भी आए. उनका कहना था कि हमें सिलाई, कढ़ाई और बुनाई की ट्रेनिंग दी जाए तो बेहतर होगा. ऐसे में बालाघाट पुलिस लाइन में एक ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया गया है. यहां पर उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दी जा रही है. वहीं, कुछ नक्सलियों ने ट्रैक्टर और जेसीबी सीखने की इच्छा जाहिर की है. ऐसे में उनके लिए भी ये व्यवस्था की जा रही है.
सरेंडर नक्सली सीख रहे मशीन चलाना
बालाघाट पुलिस लाइन के ट्रेनिंग सेंटर में सरेंडर नक्सली ट्रेनिंग मास्टर एसआई राजाराम विश्वकर्मा से कपड़े सीने की ट्रेनिंग लेते हैं. एक वक्त था जब नक्सलियों ने सरेंडर किया, तब चेहरे पर थोड़ा खौफ असहजता थी. लेकिन, अब वह सरेंडर नक्सली हंसते हैं, मुस्कुराते हैं और सीख रहे हैं. यानी सालों तक जंगलों में भटकने के बाद अब वह धीरे-धीरे मुख्यधारा के जीवन से जुड़ रहे हैं.
सरेंडर नक्सली काफी खुश
सरेंडर नक्सली लाल सिंह ने लोकल 18 को बताया कि शुरू में सीख रहे थे तो कठिन लग रहा था, लेकिन अब ये सब आसान लग रहा है. अब सरेंडर करने के बाद अच्छा लग रहा है. सुकमा के रहने वाले नवीन आसानी से कपड़ा काट लेते हैं. वहीं, सबसे पहले सरेंडर करने वाली सुनीता कभी परेशान सी दिखती थी, अब हर बात पर मुस्कुराने लगती है. ऐसा नहीं है कि उनके जीवन में दुख नहीं रहे होंगे, सालों तक जंगलों में भटकने से पहले परिवार गरीब रहा, किसी ने सलवा जुडूम जैसे आंदोलनों में अपनों को खोया. लेकिन अब सब अपनी पिछली जिंदगी को भुलाकर बेहतर जीवन की आस में हैं.
पुलिस अफसर ही दे रहे ट्रेनिंग
बालाघाट पुलिस लाइन के ट्रेनिंग सेंटर में सरेंडर नक्सली ट्रेनिंग मास्टर एसआई राजाराम विश्वकर्मा ही मौजूद हैं. उन्हीं के मार्गदर्शन में सरेंडर नक्सलियों ने अपना काम शुरू किया. शुरुआत में थोड़ी समस्या रही, लेकिन समय के साथ थोड़ी हिंदी जानने वालों के साथ अच्छा तालमेल बन गया. अब वह इशारा भी कर दें तो सभी समझ जाते हैं और बेहतर ढंग से काम सीख रहे हैं. अब तक वह बुनियादी काम सीख चुके हैं लेकिन एक्सपर्ट तब बनेंगे जब वह जितना ज्यादा काम करेंगे. एक खास बात ये भी कि सरेंडर नक्सलियों में सीखने जिज्ञासा है.
जिस पुलिस से लड़ते थे, उन्हीं की वर्दी बना रहे
सालों तक जब नक्सली भटके तो पुलिस को वह दुश्मन पार्टी कह कर बुलाते थे. लेकिन, विडंबना ऐसी की जिस पुलिस के खिलाफ लड़ते थे वहीं पुलिस इनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग दे रही है. जिन सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ते रहे, अब उन्हीं के लिए वर्दी बनाने का काम कर रहे हैं. पुलिस कर्मियों के लिए 800 वर्दियां तैयार करेंगे.