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Burhanpur Ramadan tradition: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में आज भी रमजान के महीने में करीब 400 साल पुरानी परंपरा निभाई जाती है. यहां रोजेदार शाही जामा मस्जिद की मीनार पर जलने वाली लाइट को देखकर रोजा खोलते हैं. डिजिटल युग में भी यह अनोखी परंपरा मुस्लिम समाज के बीच आज तक जीवित है. इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है और आज भी पूरे शहर के लोग इसका पालन करते हैं. जामा मस्जिद की करीब 60 फीट ऊंची मीनार से जलने वाली रोशनी पूरे शहर को रोजा खोलने का संकेत देती है.
Jama Masjid Burhanpur History: देशभर में रमजान का महीना चल रहा है और मुस्लिम समाज के लोग रोजे रखकर इफ्तार करते हैं. आज के समय में लोग मोबाइल, घड़ी और ऐप के जरिए इफ्तार का समय देखते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में आज भी एक खास परंपरा निभाई जाती है. यहां रोजेदार शाही जामा मस्जिद की मीनार पर जलने वाली लाइट देखकर रोजा खोलते हैं. जैसे ही मीनार पर लाइट जलती है, लोगों को समझ आ जाता है कि इफ्तार का समय हो गया है.
इतिहासकारों के अनुसार 400 साल पुरानी परंपरा
इतिहासकार नौशाद सर बताते हैं कि यह परंपरा करीब 400 साल पुरानी है और मुगलकाल से चली आ रही है. आज डिजिटल दौर में भी बुरहानपुर के लोग इस परंपरा को निभा रहे हैं. रमजान के दौरान शाही जामा मस्जिद की मीनार पर पहले से लाइटिंग लगा दी जाती है और इफ्तार के समय उसे जलाया जाता है. जैसे ही यह रोशनी दिखाई देती है, पूरे शहर के रोजेदार रोजा खोलना शुरू कर देते हैं.
ईद का संकेत भी देती है यही रोशनी
इतिहासकारों के अनुसार यह लाइट सिर्फ इफ्तार के लिए ही नहीं बल्कि ईद का संकेत देने के लिए भी इस्तेमाल होती है. चांद रात के दिन जैसे ही ईद का चांद दिखाई देता है, जामा मस्जिद की मीनार पर लाइट जलाई जाती है. इसे देखकर लोग समझ जाते हैं कि अगले दिन ईद मनाई जाएगी.
60 फीट ऊंची मीनार से दिखती है रोशनी
शाही जामा मस्जिद की मीनार करीब 60 फीट ऊंची बताई जाती है. इसकी ऊंचाई की वजह से मीनार पर जलने वाली रोशनी शहर के कई हिस्सों से आसानी से दिखाई देती है. लोग अपने घरों की खिड़कियों या दरवाजों से ही मीनार को देख लेते हैं और उसी संकेत के आधार पर इफ्तार करते हैं.
डिजिटल युग में भी जिंदा है परंपरा
आज के दौर में जब मोबाइल और इंटरनेट से हर जानकारी तुरंत मिल जाती है, तब भी बुरहानपुर में सदियों पुरानी यह परंपरा आज तक कायम है. मुस्लिम समाज के लोग इसे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत मानते हैं और पूरे सम्मान के साथ हर साल रमजान के महीने में इसका पालन करते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें