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How To Control Stemphylium: मार्च-अप्रैल में बढ़ते तापमान और नमी के कारण प्याज की फसल में झुलसा रोग तेजी से फैलता है. यह फफूंद जनित बीमारी पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे बनाती है, जो बाद में सूखकर गिरने लगती हैं. इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन घटता है. इससे बचाव के लिए फसल चक्र, उचित जल निकासी और जैविक और रासायनिक उपचार अपनाना जरूरी है.
How To Control Stemphylium On Onion: गर्मी की शुरुआत के साथ ही तापमान लगातार बढ़ने लगा है. ऐसे में जिन किसानों ने खेतों में प्याज की खेती की है, उन्हें इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. मार्च और अप्रैल के महीने में प्याज की फसल पर कुछ खास बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इनमें झुलसा रोग (स्टेम्फिलियम ब्लाइट) सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी मानी जाती है. यह बीमारी प्याज की पत्तियों और तनों को प्रभावित करती है, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन कम हो सकता है.
कृषि सलाहकार अनुपम चतुर्वेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि झुलसा रोग प्याज की फसल में लगने वाली एक गंभीर फफूंद जनित बीमारी है. यह मुख्य रूप से स्टेमफिलियम वेसिकेरियम नामक फंगस के कारण फैलती है. यह रोग खासतौर पर मार्च और अप्रैल के दौरान तेजी से फैलता है, जब वातावरण में नमी अधिक होती है और तापमान लगभग 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. ऐसे मौसम में फफूंद तेजी से पनपती है और पौधों को संक्रमित कर देती है.
उन्होंने बताया कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण पत्तियों पर दिखाई देने लगते हैं. सबसे पहले पत्तियों पर छोटे-छोटे पीले या भूरे रंग के धब्बे बनते हैं. समय के साथ ये धब्बे गहरे भूरे या काले रंग में बदल जाते हैं. संक्रमण बढ़ने पर पत्तियां सूखकर गिरने लगती हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है और किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बीमारी से कैसे बचाएं
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बीमारी से बचाव के लिए समय पर सही प्रबंधन बेहद जरूरी है. इसके लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए, जिससे मिट्टी में रोग पैदा करने वाले फफूंद की मात्रा कम होती है. खेत में पानी का सही निकास भी जरूरी है, क्योंकि ज्यादा नमी इस रोग को बढ़ावा देती है. इसके अलावा बीज उपचार और जैविक कवकनाशी का उपयोग भी काफी प्रभावी माना जाता है.
रासायनिक नियंत्रण के लिए किसान मैंकोजेब या कार्बेन्डाजिम जैसी दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं. वहीं, शुरुआती अवस्था में घरेलू उपाय के तौर पर नीम का काढ़ा या नीम तेल का स्प्रे भी किया जा सकता है. इससे रोग के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है.
कृषि सलाहकार का कहना है कि अगर किसान समय रहते झुलसा रोग के लक्षण पहचान लें और उचित उपाय अपनाएं तो इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. सही कृषि प्रबंधन और समय पर उपचार से प्याज की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें