नई दिल्ली. भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने द हंड्रेड 2026 की नीलामी में पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को खरीदने के फैसले पर सनराइजर्स फ्रेंचाइजी और उसकी मालकिन काव्या मारन की कड़ी आलोचना की है. दरअसल 12 मार्च को हुई नीलामी में सनराइजर्स ने ट्रेंट रॉकेट्स को पीछे छोड़ते हुए अबरार अहमद को करीब 2.34 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ लिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई भारतीय प्रशंसकों ने नाराज़गी जताई. आरोप है कि पिछले साल अबरार अहमद ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय सशस्त्र बलों का मज़ाक उड़ाया था, जिसके कारण यह विवाद और भी बढ़ गया. हालांकि इस आलोचना के बावजूद फ्रेंचाइजी अपने फैसले पर कायम रही. टीम के मुख्य कोचडैनियल विटोरी ने भी कहा कि अबरार उनकी पसंदीदा स्पिन विकल्पों में से एक थे और उन्हें किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को न लेने के लिए नहीं कहा गया था.
गावस्कर ने अपने कॉलम में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को दी जाने वाली फीस का एक हिस्सा टैक्स के रूप में पाकिस्तान सरकार तक जाता है, जो बाद में हथियार खरीदने में इस्तेमाल हो सकता है. उनके मुताबिक इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान हो सकता है
“इस फैसले से भारतीयों की मौत की जिम्मेदारी”
गावस्कर ने अपने कॉलम में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को दी जाने वाली फीस का एक हिस्सा टैक्स के रूप में पाकिस्तान सरकार तक जाता है, जो बाद में हथियार खरीदने में इस्तेमाल हो सकता है. उनके मुताबिक इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान हो सकता है. गावस्कर ने लिखा कि नवंबर 2008 के मुंबई अटैक के बाद से भारतीय फ्रेंचाइजी मालिकों ने आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करने से दूरी बनाए रखी है. उनका मानना है कि यह समझ धीरे-धीरे बनी कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दी गई फीस आखिरकार उनके देश की सरकार तक जाती है, जो हथियारों पर खर्च की जा सकती है.
द हंड्रेड में किसी भारतीय मालिक द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर जो विवाद हुआ है, वह बिल्कुल स्वाभाविक है. 2008 के मुंबई हमलों के बाद से आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया है. अब यह समझ बनी है कि खिलाड़ियों को दी गई फीस का टैक्स अंततः उस सरकार तक जाता है, जो हथियार खरीद सकती है, और इससे अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान हो सकता है.
“क्या ट्रॉफी भारतीयों की जान से ज्यादा जरूरी है?”
गावस्कर ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड के रहने वाले कोच डैनियल विटोरी भारत-पाकिस्तान के जटिल रिश्तों को शायद पूरी तरह न समझ पाएं, लेकिन फ्रेंचाइजी की मालकिन काव्या मारन को इस संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए था. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक ऐसे टूर्नामेंट को जीतना, जिसे दुनिया के बहुत कम देश खेलते हैं, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण है. भुगतान चाहे भारत से हो या किसी विदेशी सहायक कंपनी से, अगर मालिक भारतीय है तो यह पैसा अंततः उस दिशा में जा सकता है जो भारतीयों के लिए नुकसानदेह हो. डैनियल विटोरी शायद इस जटिल स्थिति को न समझें, लेकिन मालिक को तो इसकी समझ होनी चाहिए थी और उन्हें इस खरीद को रोकना चाहिए था. क्या ऐसे फॉर्मेट का टूर्नामेंट जीतना, जिसे अन्य देश खेलते भी नहीं, भारतीयों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है?”
आईपीएल में हो सकता है विरोध
गावस्कर का मानना है कि इस फैसले का असर Ipl 2026 में भी देखने को मिल सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि जब Sunrisers Hyderabad मैदान पर उतरेगी तो दर्शकों की प्रतिक्रिया काफी तीखी हो सकती है. उन्होंने कहा कि टीम के मैचों के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं और दर्शक स्टेडियम में कम संख्या में पहुंचकर अपना असंतोष जता सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल Hardik Pandya के खिलाफ हुई हूटिंग की तरह काव्या मारन को भी दर्शकों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि गावस्कर ने यह भी कहा कि अभी भी समय है और अगर फ्रेंचाइजी इस फैसले पर दोबारा विचार करती है तो शायद स्थिति संभल सकती है.
अंत में गावस्कर ने कहा कि यह हैरानी की बात नहीं होगी अगर टीम जहां भी खेले, वहां भारतीय प्रशंसक इस फैसले के खिलाफ विरोध करें. यहां तक कि टीम में बेहतरीन बल्लेबाज होने के बावजूद दर्शक स्टेडियम आने से बच सकते हैं. अभी भी समय है इस गलती को सुधारने का और उम्मीद है कि समझदारी भरा फैसला लिया जाएगा.