छिंदवाड़ा में गिरते भू-जल स्तर और कम वर्षा को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने पूरे जिले को ‘जल अभावग्रस्त क्षेत्र’ घोषित करते हुए निजी भूमि पर नए नलकूप (बोरवेल) खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 15 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगा। क्यों लिया गया फैसला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट में सामने आया कि जिले में इस बार वर्षा कम होने से भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है। इसी को देखते हुए म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 के तहत यह निर्णय लिया गया। क्या रहेगा प्रतिबंध
नियम तोड़ने पर कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने पर म.प्र. पेयजल परिरक्षण संशोधित अधिनियम 2002 की धारा-9 और IPC की धारा 188 के तहत मामला दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी को अत्यंत आवश्यक स्थिति में नलकूप खनन कराना है, तो उसे संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आवेदन देना होगा। 150 मीटर के दायरे में पूरी तरह रोक किसी भी शासकीय पेयजल स्रोत (जैसे हैंडपंप/कुएं) से 150 मीटर की दूरी के भीतर नया नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
अधिकारियों को सख्त निर्देश कलेक्टर ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी और नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। प्रशासन ने साफ किया है कि जल संकट को देखते हुए यह कदम जनहित में उठाया गया है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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