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टर्शियस बॉश ने 1992 में दक्षिण अफ्रीका के लिए अपना एकमात्र टेस्ट और दो वनडे खेले. वह अपनी तूफानी गति के लिए जाने जाते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. साल 2000 में, महज 33 साल की उम्र में टर्शियस की मृत्यु हो गई.
क्रिकेटर पिता की रहस्यमय मौत के 44 साल के बाद बेटा खेला दक्षिण अफ्रीका के लिए वर्ल्ड कप
नई दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट इतिहास में टर्शियस बॉश का नाम एक ऐसे अध्याय की तरह है जिसमें खेल की रफ्तार, एक रहस्यमयी मौत और एक बेटे के संघर्ष की भावुक कहानी छिपी है. 1992 में दक्षिण अफ्रीका की अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के समय जो गेंदबाज एलन डोनाल्ड के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तेज गेंदबाजी की कमान संभाल रहा था, उसकी मौत ने पूरे खेल जगत को झकझोर कर रख दिया था.
टर्शियस बॉश ने 1992 में दक्षिण अफ्रीका के लिए अपना एकमात्र टेस्ट और दो वनडे खेले. वह अपनी तूफानी गति के लिए जाने जाते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. साल 2000 में, महज 33 साल की उम्र में टर्शियस की मृत्यु हो गई. आधिकारिक तौर पर उनकी मौत का कारण गुइलेन-बैरे सिंड्रोम बताया गया, जो एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार है. हालांकि, उनकी मृत्यु के बाद कहानी ने एक नाटकीय मोड़ लिया.
जहर की आशंका
टर्शियस की मौत के बाद उनकी बहन रीता वैन वेटन ने शक जताया कि मौत प्राकृतिक नहीं थी. मौत के 18 महीने बाद उनके शव को कब्र से निकालकर जांच की गई. फॉरेंसिक रिपोर्ट्स में भारी धातुओं जैसे आर्सेनिक या मरकरी के माध्यम से जहर दिए जाने के संकेत मिले थे. टर्शियस की विधवा, करेन-ऐनी के दूसरे साथी वकील हेनरी सेल्जर में भी टर्शियस जैसे ही लक्षण दिखाई देने लगे थे, जिससे शक की सुई और गहरा गई.
मरने से पहले टर्शियस ने एक गुप्त वसीयत लिखी थी, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी को बेदखल कर अपनी सारी जायदाद अपने बड़े बेटे कॉर्बन बॉश के नाम कर दी थी.
कॉर्बन बॉश: पिता की विरासत का वारिस
जब टर्शियस की मृत्यु हुई, तब उनके बेटे कॉर्बन बॉश केवल 5 वर्ष के थे. पिता की रहस्यमयी मौत के साये में पले-बढ़े कॉर्बन ने उसी मैदान सेंचुरियन पर अपना घरेलू करियर शुरू किया जहाँ उनके पिता खेला करते थे.
विवरण टर्शियस बॉश का अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण 1992 (वेस्टइंडीज के खिलाफ) हुआ वहीं कॉर्बन बॉश का डेब्यू 2024 (इंग्लैंड के खिलाफ) हुआ जो मुख्य भूमिका दाएं हाथ के तेज गेंदबाज और बॉलिंग ऑलराउंडर थे.
2026 वर्ल्ड कप: एक सपना हुआ सच
पिता की मृत्यु के लगभग 26 साल बाद, कॉर्बन बॉश ने दक्षिण अफ्रीकी जर्सी पहनकर 2026 टी20 वर्ल्ड कप में अपनी छाप छोड़ी. उन्होंने यूएई के खिलाफ 3 विकेट लेकर अपनी टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई और टूर्नामेंट के दौरान भारत व वेस्टइंडीज जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ भी मैदान पर उतरे. टर्शियस बॉश की मौत की गुत्थी आज भी पूरी तरह नहीं सुलझी है और किसी पर भी हत्या का आरोप सिद्ध नहीं हो पाया लेकिन कॉर्बन बॉश ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि भले ही उनके पिता को समय से पहले छीन लिया गया, उनकी क्रिकेट विरासत आज भी जिंदा है.