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Agriculture News: तेज धूप से बचाव के लिए ग्रीन नेट या एग्रो नेट का इस्तेमाल भी जरूरी है. खासकर छत पर बने किचन गार्डन में 50 से 75 फीसदी घनत्व वाली नेट लगाने से तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है.
सीधी. मध्य प्रदेश में अचानक बढ़ी गर्मी ने सब्जी उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मार्च महीने में ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण खेतों की मिट्टी तेजी से सूख रही है. इसका सीधा असर सब्जियों की फसल पर पड़ रहा है, जहां पौधों के झुलसने और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ गया है. अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है. सीधी के किसान सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि इस मौसम में सबसे बड़ी समस्या मिट्टी की नमी का तेजी से खत्म होना है. ज्यादा तापमान के कारण पौधे ट्रांसपिरेशन स्ट्रेस में आ जाते हैं, जिससे उनकी पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं. यह स्थिति फसल की वृद्धि को सीधे प्रभावित करती है और पैदावार कम होने लगती है.
अवनीश पटेल ने सिंचाई के सही समय को बेहद अहम बताया. दोपहर की तेज धूप में पानी देने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है क्योंकि गर्म मिट्टी पर पानी पड़ने से जड़ें शॉक में चली जाती हैं, इसलिए किसानों को सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को सूर्यास्त के बाद ही सिंचाई करनी चाहिए. साथ ही पाइप से तेज धार के बजाय फव्वारे का उपयोग करना बेहतर रहता है, जिससे मिट्टी का कटाव भी नहीं होता. वहीं मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग को सबसे प्रभावी उपाय बताया गया है. इसके तहत क्यारियों या गमलों की ऊपरी सतह को सूखे पत्तों, भूसे या नारियल के छिलकों से ढक दिया जाता है. इससे मिट्टी सीधे धूप के संपर्क में नहीं आती और ठंडी बनी रहती है. इस तकनीक से पानी की जरूरत करीब 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है.
ग्रीन नेट या एग्रो नेट का उपयोग भी जरूरी
उन्होंने कहा कि तेज धूप से बचाव के लिए ग्रीन नेट या एग्रो नेट का उपयोग भी जरूरी है. खासकर छत पर बने किचन गार्डन में 50 से 75 प्रतिशत घनत्व वाली नेट लगाने से तापमान 5 से 7 डिग्री तक कम किया जा सकता है. इससे पौधों को लू और झुलसने से राहत मिलती है. गर्मी के मौसम में भारी रासायनिक खाद देने से बचने की सलाह दी गई है. इसके बजाय तरल जैविक खाद जैसे गोबर घोल या लिक्विड सीवीड का उपयोग करना चाहिए, जो पौधों को जल्दी पोषण देता है और उन्हें गर्मी सहने की ताकत देता है. नाइट्रोजन युक्त खाद का सीमित उपयोग करना बेहतर रहता है.
कीटों का बढ़ जाता है प्रकोप
उन्होंने आगे कहा कि इस मौसम में कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है. स्पाइडर माइट्स और एफिड्स जैसे कीट पत्तियों का रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देते हैं. ऐसे में नियमित निरीक्षण और नीम के तेल का छिड़काव कारगर उपाय है. वहीं लौकी, तोरई और करेला जैसी बेल वाली सब्जियों को सहारा देना भी जरूरी है. उनकी टहनियों को जमीन से ऊपर रखने के लिए जाली या रस्सी का सहारा दें. साथ ही पर्याप्त पानी और हल्का छिड़काव करने से फूल झड़ने से बचते हैं और फलन बेहतर होता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.