इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र स्थित ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में मनोज पुगलिया के घर में लगी भीषण आग में परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई। बुधवार शाम सभी मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। विजय सेठिया की छोटी बेटी ने अधिकांश लोगों को मुखाग्नि दी। वहीं हादसे की आपबीती बताते हुए मृतक मनोज पुगलिया का बेटा सौमिल बार-बार घटना को याद कर सहम जाता है। सौमिल ने बताया कि आग लगते ही पूरे घर में धुआं फैल गया था। अंधेरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। बड़े भाई सौरभ ने सभी को आवाज देकर जगाया। हालात ऐसे थे कि समझ नहीं आ रहा था क्या करें। जैसे-तैसे सौरभ, मां सुनीता, छोटा भाई हर्षित और सौमिल बालकनी तक पहुंचे। वहां से पड़ोसी को आवाज लगाई। जालियां तोड़कर पड़ोसी की मदद से सीढ़ी के जरिए चारों लोग बाहर निकल सके। बाहर आने के बाद उन्होंने अंदर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की, लेकिन आग और धुएं के कारण अंदर नहीं जा सके। पत्नी सिमरन नहीं बच सकीं मनोज के बड़े बेटे सौरभ ने बताया कि इलेक्ट्रिक कार में आग लगने के बाद मुख्य गेट पूरी तरह आग की चपेट में आ गया था। बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। उन्होंने मां और दोनों भाइयों को बाहर निकाला, लेकिन जब दोबारा अंदर गए तो पूरा घर धुएं से भर चुका था। पत्नी सिमरन, मामा, उनके बच्चे और पिता अंदर ही फंस गए। धुएं के कारण आवाज भी नहीं दे पा रहे थे। जो जिस पोजीशन में था वह वैसा का वैसा ही रह गया। सिमरन बैठी अवस्था में ही रह गईं। सीढ़ियों पर मिले तीन शव हादसे के बाद पुलिस, एफएसएल और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू के दौरान दूसरी मंजिल की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर तीन शव मिले। ये लोग छत की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन चैनल गेट लॉक होने के कारण बाहर नहीं निकल सके और धुएं के कारण उनकी मौत हो गई। प्लायवुड के कारण तेजी से आग घर में फैल गई पुलिस के मुताबिक मनोज पुगलिया का घर फुली फर्निश्ड था। फर्स्ट फ्लोर पर अधिकतम हिस्सा प्लायवुड औैर लकड़ी के फर्निचर से इंटिरियर किया हुआ था। फर्स्ट फ्लोर पर आग लगने के बाद तेजी से आग फैली और पूरे घर को चपेट में ले लिया। इसके अलावा पोर्च में शार्ट सर्किट के निशान मिले, जिसके कारण घर में खड़ी बुलेट, लगभग 17 लाख रूपए कीमत की हायाबुसा और एक स्कूटर जल गया। वहीं घर में कुछ केमिकल भी रखा हुआ था, जिसके कारण आग तेजी से फैली। 30 साल पहले इंदौर आया था मनोज मनोज पुगलिया मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। वह 30 साल पहले इंदौर आए थे। मनोज ने इंदौर में सियागंज में एक दुकान से इंडस्ट्रियल सप्लाई का बिजनेस शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने लगातार व्यापार को फैलाया और संपत्ति खड़ी की। मनोज पुगलिया की कंपनी का एक ऑफिस सियागंज में है, जिसे बड़ा बेटा सौरभ संभालता है। जबकि दूसरा ऑफिस पीथमपुर में है, जिसे मंजला बेटा सौमिल और छोटा बेटा हर्षित संचालित करते हैं। हादसे में सबसे ज्यादा विजय का परिवार खत्म हुआ हादसे में मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन के साथ मनोज के साले विजय सेठिया के परिवार के लोगों की मौत हो गई। 23 जनवरी को मनोज के बेटे सौमिल की शादी हुई थी। परिवार में छोटे-मोटे कार्यक्रम हो रहे थे, इसी सिलसिले में परिवार के लोगों का आना-जाना लगा हुआ था। वहीं, विजय सेठिया को जबड़े का कैंसर था, जिसके इलाज के लिए वे इंदौर आए थे। शादी के समय से ही उनका पूरा परिवार मनोज के घर पर रुका हुआ था। रिवाज के कारण बची छोटी बहू इस हादसे में मनोज की बड़ी बहू की मौत हो गई, जबकि छोटी बहू की जान रिवाज के कारण बच गई। मनोज के करीबी रिश्तेदार ने बताया कि उनके घर में परंपरा है कि नई बहू को मंगलवार के दिन ससुराल नहीं लाया जाता। इसी वजह से सौमिल की पत्नी अपने मायके पेटलावद में ही थी। बुधवार को उसे घर लाने के बाद परिवार में एक छोटा कार्यक्रम होना था, जिसमें उसके मायके वाले भी शामिल होने वाले थे। बच्चे के शव को बॉक्स में लेकर पहुंची टीम इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दुखद मौत तन्मय की हुई है। तन्मय की उम्र मात्र 6 साल है। तन्मय का शव घर में नहीं मिल रहा था। एसडीआएफ की टीम ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे का शव को ढूंढा। बच्चा आग के कारण इतना झुलस गया था कि डॉक्टर की टीम उसे पोटली में लपेटकर एमवाय हॉस्पिटल पोस्टमार्टम करने पहुंची। वहीं पोस्टमार्टम होने के बाद तन्मय के शव को बॉक्स में रखकर शमशान घाट भेजा गया। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर में EV ब्लास्ट, एक साथ 7 चिताएं जलीं इंदौर में इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत 8 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…
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