एग्जाम में टॉप करके भी नहीं मिलेगी नौकरी: परीक्षा फॉर्म भरने में शिक्षकों की छोटी सी गलती, सरकार से गुहार- सुधार का मौका दें – Madhya Pradesh News

एग्जाम में टॉप करके भी नहीं मिलेगी नौकरी:  परीक्षा फॉर्म भरने में शिक्षकों की छोटी सी गलती, सरकार से गुहार- सुधार का मौका दें – Madhya Pradesh News




पिता का निधन हो चुका है, मां मजदूरी करती हैं। मैं खुद तीन हजार रुपए की सैलरी में प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहा हूं। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार नौकरी लग जाएगी, तो आर्थिक स्थिति ठीक हो जाएगी, लेकिन एक छोटी सी गलती की वजह से भविष्य संकट में पड़ गया है। यह कहना है प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2025 में प्रदेश में तीसरा स्थान पाने वाले रामगोपाल पालिया का। पिछोर के रहने वाले रामगोपाल विकलांग हैं और एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं। प्रदेश की मेरिट में SC दिव्यांग श्रेणी में तीसरे स्थान पर आने के बाद भी रामगोपाल शिक्षक भर्ती की चयन प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। इसका कारण परीक्षा आवेदन फॉर्म भरते समय हुई एक गलती है। वो गलती क्या थी जिससे हजारों शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है? और क्या कोई ऐसा रास्ता बचा है जिससे उन्हें नौकरी मिल सके? पढ़िए इस रिपोर्ट में-
अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरते समय स्पेशल डीएड ऑप्शन पर टिक कर दिया था, जबकि उनके पास सामान्य डीएड का डिप्लोमा है। यही वो गलती थी जिससे शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। ये गलती रामगोपाल से ही नहीं, बल्कि उनकी तरह 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों से फॉर्म भरते समय हुई। रिजल्ट आने के बार मेरिट में आने वाले करीब एक हजार अभ्यर्थी हैं, जिनको इसकी वजह से 5 फीसदी बोनस अंक मिल गए, जबकि अब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में स्पेशल डीएलएड न होने की वजह से इनका चयन रुक सकता है। ये है डीएड और स्पेशल डीएड में अंतर इस भर्ती में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई थी। परीक्षा के नोटिफिकेशन के कॉलम 7.7 में RCI स्पेशल एजुकेशन से जुड़ी जानकारी दी गई थी। इसके तहत दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों के पास स्पेशल डीएड होना अनिवार्य है। यह प्रमाणपत्र भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन RCI द्वारा जारी किया जाता है। सरल शब्दों में, सामान्य डीएड से सामान्य बच्चों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि स्पेशल डीएड दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण होता है। अपात्र घोषित हो सकते हैं ऐसे अभ्यर्थी ज्यादातर अभ्यर्थियों को स्पेशल डीएड के बारे में ठीक से जानकारी नहीं थी। फॉर्म भरते समय उन्होंने स्पेशल डीएड वाले कॉलम में गलती से ‘Yes’ टिक कर दिया, जबकि उनके पास सामान्य डिप्लोमा ही था। रिजल्ट आने पर इस गलती के कारण उन्हें 5% बोनस अंक भी मिल गए। अब मेरिट में आने के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान स्पेशल डीएड न होने पर इन्हें अपात्र घोषित किया जा सकता है। अभ्यर्थी बोले- कन्फ्यूजन के कारण हुई गलती सतना से भोपाल कर्मचारी चयन मंडल पहुंची ज्योति पटेल ने बताया कि वर्ग-3 चयन परीक्षा में उनका चयन हो गया है, लेकिन आवेदन फॉर्म भरते समय RCI से संबंधित स्पेशल डिप्लोमा पर गलती से टिक हो गया। फॉर्म में सामान्य डिप्लोमा के सामने अलग से टिक करने का स्पष्ट ऑप्शन नहीं था, जिसके कारण कन्फ्यूजन की स्थिति बनी। ज्योति ने आगे बताया कि वे पहले गेस्ट टीचर के तौर पर पढ़ाती थीं, लेकिन बेटी के जन्म के बाद नौकरी छोड़नी पड़ी। अब वे अपनी छोटी बच्ची को साथ लेकर सतना से भोपाल आई हैं और शासन-प्रशासन से अपील कर रही हैं कि उन्हें इस गलती को सुधारने का एक और मौका दिया जाए, ताकि उनका चयन प्रभावित न हो। दो बार दिया गया सुधार का मौका नोटिफिकेशन के कॉलम 7.8 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि बोनस अंकों से संबंधित जानकारी या अभिलेख सही नहीं होने, अथवा किसी भी प्रकार की असत्य/गलत जानकारी/तथ्य प्रस्तुत करने पर अभ्यर्थी की अभ्यर्थिता किसी भी स्तर पर समाप्त की जा सकती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी अभ्यर्थी की होगी और इस संबंध में अभ्यर्थी का कोई भी दावा या आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया के दौरान मंडल ने अभ्यर्थियों को इस कॉलम में सुधार करने के लिए दो बार पर्याप्त अवसर प्रदान किए थे। मंडल ने दी थी पोर्टल खोलने की अनुमति फॉर्म भरने के बाद कई अभ्यर्थियों ने गलतियों के सुधार के लिए पोर्टल दोबारा खोलने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के निर्देश पर चयन मंडल ने पोर्टल खोलने की अनुमति दी। मंडल ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर किए गए सुधार ही मान्य माने जाएंगे और उसी आधार पर आगे की भर्ती प्रक्रिया संचालित की जाएगी। दूर-दराज के गांवों में जानकारी नहीं मिली शाजापुर की रहने वाली विद्या प्रजापति भी उन अभ्यर्थियों में शामिल हैं, जिन्हें इस बात का पता नहीं चल सका कि दो बार सुधार का मौका मिला है। ओबीसी कैटेगरी में 20वीं रैंक हासिल करने वाली विद्या वर्तमान में सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर के रूप में पढ़ा रही हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। विद्या ने बताया कि वर्ग-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा में उनका चयन हो चुका है। हालांकि, फॉर्म में ‘समकक्ष’ विकल्प के बारे में स्पष्टता न होने के कारण उन्हें यह समझ नहीं आया कि इसे चुनना चाहिए या नहीं। इसके अलावा, सुधार विंडो से जुड़ा कोई व्यक्तिगत संदेश या सूचना उन्हें प्राप्त नहीं हुई, जिसके चलते वे निर्धारित समय में गलती सुधार नहीं पाईं। अब आगे क्या: चयन मंडल के फैसले पर नजर 16 मार्च को ग्वालियर, सीहोर, शिवपुरी, सतना, शाजापुर, टीकमगढ़, इंदौर समेत अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थी भोपाल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को भी आवेदन देने पहुंचे थे। इससे पहले डीपीआई, कर्मचारी चयन मंडल को आवेदन दे चुके हैं। इन छात्रों को दोबारा फॉर्म में करेक्शन करने का मौका मिलेगा या नहीं इस पर शिक्षण संचलनालय और चयन मंडल की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार रिजल्ट घोषित होने के बाद सुधार चयन मंडल के अधिकार क्षेत्र में है। कर्मचारी चयन मंडल दूसरी बार मौका देने के साथ ही नोटिफिकेशन में स्पष्ट कर चुका है कि इसके बाद दावा स्वीकार्य नहीं होगा।



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