चैत्र नवरात्रि शुरू, सज गए सागर के प्रसिद्ध देवी मंदिर, इनमें एक सदियों पुराना, PHOTOS

चैत्र नवरात्रि शुरू, सज गए सागर के प्रसिद्ध देवी मंदिर, इनमें एक सदियों पुराना, PHOTOS


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Sagar Famous Devi Mandir: 19 मार्च यानी आज से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो गई है. इस बार चैत्र नवरात्रि पर कुछ विशेष ज्योतिषीय संयोग भी बन रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्रि गुरुवार से शुरू होने के कारण माता दुर्गा का आगमन पालकी पर माना गया है. कुछ लोग इसे शुभ तो कुछ अशुभ संकेत मान रहे हैं. फिलहाल, अगर आप सागर में हैं तो इन देवी मंदिरों का दर्शन जरूर करें.

नवरात्रि के साथ ही हिन्दू नववर्ष नव संवत्सर 2083 की भी शुरुआत हो गई. पंडित रामगोविंद शास्त्री के मुताबिक, इस बार नवरात्रि पूरे 9 दिन की है. किसी भी दिन या तिथि का क्षय नहीं है. ऐसे में भक्त पूरे 9 दिन मां की आराधना करते हुए नवरात्रि पूजन, व्रत को पूरा करेंगे, नवरात्रि में पूजन करने से देवी मां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

सागर शहर में देवीजी के कुछ प्रमुख मंदिर हैं, जहां पर रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. इनमें से कई स्थानों पर मेला भी लगता है, जो छोटे-छोटे बच्चों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहता है. धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने में भी ये बच्चों के लिए अच्छी साधन होते हैं.

सागर शहर में सबसे प्रसिद्ध बाघराज मंदिर है. यहां पर हरसिद्धि देवी तीन रूप में विराजमान हैं. यह सदियों पुराना मंदिर है, लेकिन मंदिर का पुनर्निर्माण होने से भाव और दिव्य दर्शन होते हैं. यहां शहर के अलावा दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आते हैं. मंदिर परिसर में प्रसिद्ध अजगर दादा की रहस्यमई गुफा भी है. यहां के क्षेत्र पर नाग देवताओं की विशेष कृपा मानी जाती है. जहां कभी किसी प्रकार की अनहोनी नहीं होती है.

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सागर की 400 साल पुरानी लाखा बंजारा झील किनारे चकरा घाट पर प्राचीन शीतला माता मंदिर है, जो शहर के पुरानी रहवासियों की 90% घरों की कुलदेवी हैं. यह मंदिर साढ़े 300 साल पुराना बताया जाता है. यहां पर शीतला माता अन्य देवियों के साथ विराजमान हैं. नवरात्रि के दिनों में शहर भर के लोग पूजन करने के लिए आते हैं.

सागर के गोपालगंज में बंगाली काली मंदिर लगभग 200 साल पुराना है. यहां पर बंगाली काली विराजमान हैं. यह शहर के लोगों के लिए आस्था का केंद्र तो है ही, यहां पर बंगाली समाज के लोगों का यह एकमात्र मंदिर है, जहां पर बंगाली समाज द्वारा एक दिन पहले से ही मंदिर की विशेष सजावट करने के बाद सामूहिक रूप से पूजन शुरू कर दिया गया है.

काकागंज में महलवार देवी मंदिर है, जो काफी प्राचीन है. शहर वासियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. जनश्रुतियों के आधार पर स्थानीय लोग इस मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में भी प्रचारित करते हैं. हालांकि, नवरात्रि में यहां पर हजारों की संख्या में लोग आते हैं और मेला भी लगता है. आम दिनों में यह स्थान शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियों का यह केंद्र रहता है.

शहर के चमेली चौक बड़ा बाजार क्षेत्र में कोलकाता की तर्ज पर बनवाया गया महाकाली का प्रसिद्ध मंदिर है. चैत्र नवरात्रि पर यहां विशेष पूजन अर्चन किया जाता है. इस मंदिर को महाकाली दस महाविद्या सिद्ध शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है.

शहर के इतवारा में प्रसिद्ध बुंदेलखंड का एकमात्र उत्तर मुखी सरस्वती मंदिर भी है. देवियों में इनकी पूजा का विशेष स्थान है. शहर वासियों के लिए सरस्वती माता का मंदिर श्रद्धा का बड़ा केंद्र है. नवरात्रि में माता का नवीन श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहता है. यह करीब 70 साल पुराना मंदिर है.



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