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भोपाल के गोमांस तस्करी केस में असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को जमानत मिल गई है. पुलिस की तरफ से बताया गया है कि विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी. असलम की जमानत पर हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है और नाराजगी जाहिर की है.
असलम चमड़े को मिली जमानत
रिपोर्ट-रामाकांत दुबे
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गौमांस तस्करी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है. कोर्ट की तरफ से जांच में कई कमियां बताई गईं. असलम कुरैशी की तरफ से कोर्ट में साबित किया गया कि उसके ट्रक में गाय का मांस नहीं था और उसे 35 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है.
हैदराबाद की लैब की रिपोर्ट नहीं हो सकी प्रस्तुत
असलम चमड़ा के अधिवक्ता ने भोपाल जिला अदालत में कहा कि जो मांस सैंपल के लिए हैदराबाद भेजा गया था. उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें. लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर सकी. सत्र न्यायालय में द्वितीय जमानत आवेदन का हिंदू संगठन ने कड़ा विरोध किया था. भानु हिंदू ने न्यायमूर्ति पंकज कुमार जैन जी की कोर्ट में उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई थी. मथुरा लैब की रिपोर्ट में गौमांस होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन हैदराबाद की लैब की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हुई थी.
हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के सामने दिसंबर 2025 में एक ट्रोक रोका, तो उसमें 25 से 26 टन गोमांस होने का दावा किया गया. पुलिस ने ट्रक को जब्त करके और सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए. इसके बाद पुलिस ने स्लॉटर हाउस को भी बंद करवा दिया. असलम कुरैशी पर आरोप है कि स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर मांस मुंबई भेजा जा रहा था. फॉरेंसिक रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि के बाद आरोपी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. इस मामले में एसआईटी पहले ही 500 पन्नों का चालान अदालत में पेश कर चुकी है.
असलम चमड़े की जमानत पर हिंदू संगठनों का विरोध
हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने सेशन कोर्ट से असलम चमड़े को जमानत दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि असलम चमड़े जैसे को हत्यारे को इतनी आसानी से जमानत दे दी गई. यह एक सोचने वाला विषय है कि सीट की रिपोर्ट किस प्रकार प्रस्तुत की गई? केवल ड्राइवर और असलम चमड़े को मुजरिम बनाया गया, बाकी सहयोगियों को छोड़ दिया गया. इसमें सही तरीके से शासन ने अपना पक्ष नहीं रखा. हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच या मांग करता है कि असलम के ऊपर तत्काल रासुका की कार्रवाई की जाए अन्यथा हम जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.